Syed Abdul Rahim Biography in Hindi : आज हम बात करने वाले हैं सैयद अब्दुल रहीम के बारे में दोस्तों अभी के समय में हमारा भारत वर्ल्ड के फुटबॉल खेलो में थोड़ा पीछे लेकिन अगर बात करें साल 1950 से 1963 की तो उस समय हमारे भारत देश के फुटबॉल टीम के कोच और मैनेजर सैयद अब्दुल रहीम फुटबॉल के करियर में काफी नाम बनाया था।

सैयद अब्दुल रहीम को भारतीय फुटबॉल के स्वर्ण युग में बहुत ही आगे जाने श्रेय दिया जाता है।

मैं आपको बता दूं रहीम एक ऐसे भारतीय खिलाड़ी थे जिन्होंने दुनिया के सबसे बड़े बीमारी कैंसर जैसी बीमारी होने के बावजूद भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किए थे।

बात जब आती है फुटबॉल की तो सैयद अब्दुल रहीम का नाम आज भी गर्व से लिया जाता है शहीद अब्दु ल रहीम 1950 से लेकर 1983 तक भारतीय राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के बेहतरीन कोच थे और उसी के साथ मैनेजर भी थे।

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सैयद अब्दुल रहीम का जन्म 17 अगस्त 1909 हैदराबाद में हुआ था। अब्दुल रहीम जी को बचपन से खेल कूद में बहुत शौक था वह बहुत सारे खेल खेलते थे उनको फुटबॉल में बहुत ज्यादा रुचि थी।

मैं आपको बता दूं! सैयद अब्दुल रहीम को “द आर्किटेक्ट ऑफ मॉडर्न इंडियन फुटबॉल कोच” के नाम से भी जाना जाता था यह नाम बस ऐसे ही नहीं परा! वाकई में सैयद अब्दुल रहीम को फुटबॉल खेल की बहुत ज्यादा समझती और फुटबॉल खेल को वो बहुत ही अच्छे से खेला करते थे।

आज हम सैयद अब्दुल रहीम के बारे में पूरा विस्तार से जानेंगे और सैयद अब्दुल रहीम के परिवार के बारे में जानेंगे कि उनके परिवार में कौन-कौन है इसी के साथ सैयद अब्दुल रहीम का करियर के बारे में भी जानेंगे मैं आपको पूरा विस्तार से बताऊंगा कि इन्होंने कैसे भारत देश का नाम रोशन किया हैअब्दुल रहीम के जीवन परिचय के बारे में.

मैं आपको बताऊंगा और मैं आपको यह भी बताऊंगा कि अब्दुल रहीम कैंसर जैसे बड़ी बीमारी होने के बावजूद भी उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल कैसे लाया यह बहुत बड़ी बात हो जाती है एक इंसान के लिए जब वह इतनी बड़ी बीमारी से लड़ रहा होता है और उस परिस्थिति में कोई इंसान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल जीत कर ले आए।

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आप लोग को सैयद अब्दुल रहीम के बारे में जरूर जाना चाहिए इनके बारे में पूरा विस्तार से जाने के लिए इस लेख के साथ बने रहे

Syed Abdul Rahim Biography in Hindi – Age, Caste, Date of Birth, Cause of Death, Family

Syed Abdul Rahim Biography in Hindi

Quick Information About Syed Abdul Rahim in Hindi

पूरा नाम (Full Name)सैयद अब्दुल रहीम
निक नेम (Nick Name)रहीम साहब, आधुनिक भारतीय फुटबॉल के वास्तुकार, द स्लीपिंग जॉइंट
पेशा (Profession)फुटबॉल कोच, टीचर
मशहूर होने का कारण (Reason of Famous)1956 के मेलबर्न ओलंपिक फुटबॉल टूर्नामेंट में सेमीफाइनल में भारतीय टीम को कोचिंग दिया था और एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीताया था। 
जन्म (Birth Date)17 अगस्त 1909
जन्मस्थान (Birth Place)हैदराबाद, भारत
आयु –  मृत्यु के समय (Age – Time of Death)53 साल 
मौत का कारण (Cause of Death)कैंसर बीमारी
शिक्षा (Education)इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग किया 
कॉलेज (College)ओसमान यूनिवर्सिटी इंडिया कॉलेज 
शैक्षणिक योग्यता (Education Qualification)ग्रेजुएशन 
जाति (Caste)मुस्लिम
धर्म (Religion)इस्लाम 
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)विवाहित
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय
फैमिली (Family Name)वाइफ –  नहीं पता, बेटा – सैयद शाहिद हकीम 

सैयद अब्दुल रहीम जब स्कूल जाया करते थे तो उनके स्कूल में जितने भी स्पोर्ट्स कराएं जाते थे अब्दुल रहीम हर एक स्पोर्ट्स में भाग लेते लेते थे और ज्यादातर खेलों में उन्होंने काफी इनाम भी अपने नाम किया है बचपन से ही रहीम काफी ज्यादा एक्टिव रहा करते थे और उन्होंने फुटबॉल को अपना लोकप्रिय खेल समझा और चूना।

सैयद अब्दुल रहीम अपने पढ़ाई के साथ-साथ स्पोर्ट्स ने भी अच्छे हैं उन दिनों अब दूर रहे अपने स्कूल और अपने कॉलेज टीम्स के लिए खेला करते थे जोकि ओसमान यूनिवर्सिटी थी और इसी के साथ साथ सैयद अब्दुल रहीम ने अपना पढ़ाई आगे किया।

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उन्होंने ग्रेजुएशन कंप्लीट की और अपने करियर की शुरुआत करने के लिए उन्होंने किसी स्कूल में टीचिंग की जॉब भी की टीचिंग करने के बाद अब्दुल रहीम फुटबॉल टीम मे कोच के रूप में काम करना शुरू कर दिया इसी इसके बाद रहीम साहब इंडियन फुटबॉल टीम को एक नया पहचान दिए एक नई ऊंचाई तक लेकर गए।

दुख की बात है कि इतने बड़े और इतने होनहार फुटबॉल कोच जिन्होंने हमारे भारत देश का नाम रोशन किया हमारे भारत देश का नाम फुटबॉल के खेलों में बहुत आगे तक ले गए वह अब इस दुनिया में नहीं है सैयद अब्दुल रहीम की मृत्यु 11 जून 1963 को हो गई थी।

सैयद अब्दुल रहीम का प्रारंभिक जीवन (Syed Abdul Rahim Early Life in Hindi)

अब्दुल रहीम का जन्म भारत के हैदराबाद शहर मैं एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। भारत के फुटबॉल में अब शायद कम हो गया है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब हैदराबाद को कभी भारतीय फुटबॉल का पावर हाउस का जाता था।

1909 मैं अब्दुर रहीम का जन्म हुआ था और हैदराबाद से ही अब्दुल रहीम अपना व्यापार करना सीखे थे। जब वह फुटबॉल खेला करते थे तब उस समय हैदराबाद के फुटबॉल सर्किट में अब्दुल रहीम प्रमुख व्यक्ति के रूप में गिने जाते थे।

अब्दुल रहीम ने उस्मानिया विश्वविद्यालय फुटबॉल टीम के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी और इसी के साथ अपने खेल की शुरुआत की थी अब्दुल रहीम साहब शुरुआती दौर में एक शिक्षक थे इसके बाद फिर उन्होंने शिक्षक को छोड़कर फुटबॉल में जाने को चुना।

साल 1920 से लेकर 1940 के बीच अब्दुल रहीम को हैदराबाद के महानतम खिलाड़ी में से एक देखा जाता था जब अब्दुल रहे कमर क्लब के लिए खेलते थे और उस समय के दौरान हैदराबाद के स्थानीय लीग में कमर क्लब सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक मानी जाती थी।

साल 1939 में, जब हैदराबाद फुटबॉल एसोसिएशन का नामजान आ गया उसी के 3 साल बाद 1942 में एस एम आदि फैजाबाद कोर्ट बॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष और रहीम सचिव के रूप में चुने गए। उस समय के दौरान अब्दुल रहीम एक बहुत ही प्रतिभाशाली कोच हुआ करते थे जो कि उस समय के प्रतिभा को खोजने और बहुत ही अच्छे खिलाड़ियों की क्षमता को निखारने के लिए जाने जाते थे।

सैयद अब्दुल रहीम एक सख्त अनुशासनात्मक रूप से प्रकृति, राजनीति (Battle Strategy), प्रेरक भाषण (Persuasive Speech) और दूर दृष्टि से फुटबॉलऔरों को एक श्रृंखला बनाने के लिए जाने जाते थे।

अब्दुल रहीम के समय हैदराबाद में फुटबॉल खेलों की स्थिति बहुत ही खराब थी लेकिन जब अब्दुल रहीम ने वहां के फुटबॉल खिलाड़ियों को संभालना शुरू किया हैदराबाद के फुटबॉल के बुनियादी ढांचे में सुधार आने लगी और अब्दुल रहीम का इसमें बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। सैयद अब्दुल रहीम को लोग तब जाना शुरू किया जब उन्होंने 1940 के दशक में मध्य में हैदराबाद सिटी पुलिस टीम को संभाला शुरू किया था।

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अब्दुल रहीम ने टीम को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था टीम पहले इतनी मजबूत नहीं हुआ करते थे लेकिन जब से अब्दुल रहीम ने उस टीम को सिखाना शुरू किया है उसको अपने तरीके से आगे बढ़ाया है इस वजह से सिटी पुलिस टीम काफी लंबे वक्त तक स्थानीय और राष्ट्रीय फुटबॉल टीमों पर हावी रही थी.

और इसके अलावा हैदराबाद फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव के रूप में प्रबंधन करते हुए सैयद अब्दुल रहीम ने जमीनी स्तर पर बहुत ज्यादा ध्यान केंद्रित करके जितने भी फुटबॉल खिलाड़ी थे उनकी उत्पादन लाइन को बेहतर करने में रहीम साहब का बहुत ही बड़ा हाथ था।

सैयद अब्दुल रहीम जब हैदराबाद सिटी पुलिस टीम के साथ एक कोच के रूप में उनकी सफलता देखी जो कि देश के सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक थी लेकिन उस समय किसी का ध्यान उन पर नहीं गया लेकिन 1950 में रहीम को भारतीय टीम का मुख्य कोच बनाया गया था.

उनका असर तो तत्काल था लेकिन 1951 में दिल्ली में आयोजित उद्घाटन एशियाई खेलों में सैयद अब्दुल रहीम ने ईरान के खिलाफ हमारे देश भारत के अंतिम गेम के दर्शकों के बीच जब वहां पर भारत देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू आए हुए थे उनके सामने भारत को स्वर्ण पदक जिता कर भारत का नाम रोशन किया।

सैयद अब्दुल रहीम का करियर (Syed Abdul Rahim Career in Hindi)

रहीम का जन्म 17 अगस्त 1909 को हैदराबाद, भारत में हुआ था। अपने प्रारंभिक वर्षों में, उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय की फुटबॉल टीम का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की और एक टीम “इलेवन हंटर्स” के लिए खेला जो कॉलेज के वर्तमान और पूर्व छात्रों से बनी थी। एक शिक्षक के रूप में अपनी यात्रा के बाद, रहीम अपनी कला की डिग्री पूरी करने के लिए कॉलेज लौट आया।

इसके बाद, उन्होंने काचीगुडा मिडिल स्कूल, उर्दू शरीफ स्कूल, दारुल-उल-उलूम हाई स्कूल और चदरघाट हाई स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया। इसके बाद उन्होंने शारीरिक शिक्षा में डिप्लोमा किया और पिछले दो स्कूलों में खेल गतिविधियों की कमान संभाली, जहां उन्होंने शिक्षक के रूप में काम किया था।

रहीम कुछ समय के लिए पेशेवर फुटबॉलर थे, क्योंकि उन्होंने कमर क्लब का प्रतिनिधित्व किया था, जिसे तब स्थानीय लीग की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक माना जाता था।

रहीम ने मैनेजर बनने से पहले डच क्लब एचएसवी होक के लिए भी खेला था। 1943 में, रहीम को हैदराबाद फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव के रूप में चुना गया था। वह 1943 से 1963 तक हैदराबाद सिटी पुलिस के कोच भी बने है।

भारत के कोच के रूप में रहीम का पहला कार्य 1949 में सीलोन का दौरा करने वाली टीम को प्रशिक्षित करना था। दो साल बाद, भारत ने 1951 में सैयद अब्दुल रहीम ने अपने पहले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया था।

रहीम के कार्यकाल में भारतीय फुटबॉल टीम को काफी सफलता मिली। 1951 और 1962 में एशियाई खेलों को जीतने के अलावा, भारत 1956 के मेलबर्न ओलंपिक के सेमीफाइनल में भी पहुंचा, जिसे अभी भी फुटबॉल में भारत की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

रहीम की आखिरी सफलता जकार्ता में 1962 के एशियाई खेलों में थी, जहां भारत ने फाइनल में दक्षिण कोरिया को 100,000 की भीड़ के सामने हराकर स्वर्ण पदक को हासिल किया था।

सैयद अब्दुल रहीम एक बहुत ही डिसिप्लिन में रहने वाले इंसान थे उन्होंने अपने खिलाड़ियों को बहुत ही अच्छे तरीके से ट्रेनिंग दी थी जिसका परिणाम मैं उन्होंने भारत देश का नाम रोशन किया लेकिन इसके बाद ही रहीम को कैंसर जैसी बड़ी बीमारी का सामना करना पड़ गया और आखिरी दम तक वह लड़ते रहे वह अपने देश के लिए खेलते रहे लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और उनको दुनिया छोड़कर जाना पड़ा।

बिना जूतों के वजह से फुटबॉल खेलने से हारी भारतीय टीम

बिना जूतों के फुटबॉल खेलने से हारी थी भारतीय टीम जी हां यह सच है यह बात है साल 1952 की जब भारतीय टीम ओलंपिक में खेलने के लिए फिनलैंड गई थी वहां पर भारतीय टीम का मुकाबला युगोस्लाविया से हुआ था। उस दौरान भारत को बहुत ही खराब आंकड़े मिले थे और भारी हार का सामना भी करना पढ़ा था।

हार के आंकड़े 1-10 थे जो कि बहुत ही अपमानजनक थे और हार का मुख्य कारण भारतीय टीम का जूता ना पहनकर खेलना था। इसके बाद जब भारत अपने देश वापस लौटी तब उन सभी खिलाड़ियों को जूते पहनाकर खेलने की घोषणा की गई और शायद यही एक कारण था कि अब्दुल रहीम को यह भी मना कर दिया गया कि वह अपने अनुसार से टीम ना चुने।

उस समय के दौरान राज्य की टीम को W- गठन में बदल दिया गया था और शुरुआती दौर में इस टीम का बहुत ही मजाक बना था लेकिन साल 1952 में इसने अपने कट्टर दुश्मन जो कि पाकिस्तान था उसको हराकर अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को पूरी दुनिया के सामने दिखाया।

मैं तो बता दूं भारत में चले गए 1950,1957 और 1959 के मैच में हैदराबाद पुलिस टीम ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से सबको चौका दिया और उनके प्रदर्शन इतने अच्छे थे कि उनको 9 सालों के अंदर 12 पदक अपने नाम किया।

कैंसर होने के बावजूद अब्दुल रहीम भारत को गोल्ड मेडल दिलआया!

जब वह इंडियन फुटबॉल टीम के कोच थे तब उस दौरान उनको कैंसर जैसी बड़ी बीमारी थी और इसी कारण उनकी मृत्यु 11 जून 1983 को हो गई थी। इतने बड़े बीमारी होने के बाद भी सैयद अब्दुल रहीम मैदान पर डटे रहे और अपने देश के लिए गोल्ड मेडल भी जिता कर लाया था।

कैंसर कितनी बड़ी बीमारी है यह तो आपको पता ही है कैंसर का इलाज समय तो होना बहुत जरूरी है लेकिन उस समय कैंसर का इलाज नहीं था जिस वजह से अब्दुल रहीम की मौत हो गई और शायद कैंसर का इलाज अभी भी इतना ठीक नहीं है।

अब्दुल रहीम की मृत्यु के बाद हैदराबाद के फुटबाल टीमों में बहुत ही नुकसान देखने को मिला इसमें कोई दो राय नहीं है कि अब्दुल रहीम अपने समय में बहुत ही अच्छे इंसान थे।

अब्दुल रहीम के मृत्यु के बाद भारतीय टीम कभी भी उनके ऊंचाइयों को छूने में कामयाब नहीं हो पाए उनके जाने के बाद मानव हैदराबाद भारत से फुटबॉल खेल का नामोनिशान मिट गया रहीम के मृत्यु के बाद हैदराबाद में फुटबॉल खेल में बहुत बड़ा नुकसान देखने को मिला जिस शहर में फुटबॉल के खिलाड़ी इतने अच्छे हुआ करते थे कुछ समय के बाद मानव राष्ट्रीय स्तर से गायब ही हो गया। इतने वर्ष गुजर जाने के बाद अब्दुल रहीम के उपलब्धियों के बारे में अब कोई बात नहीं करता है शायद अब्दुल रहीम का नाम अब किसी के जवाब पर नहीं आता है।

FAQ on Syed Abdul Rahim Biography in Hindi

Q1. सैयद अब्दुल रहीम कौन थे?

भारतीय फुटबॉल टीम के कोच (Coach) सैयद अब्दुल रहीम थे और इसी के साथ एक शिक्षक भी थे।

Q2. सैयद अब्दुल रहीम (Syed Abdul Rahim Movie) पर कौन सी मूवी बनी है?

सैयद अब्दुल रहीम पर “मैदान” नाम की मूवी बनी है जिसमें अजय देवगन सैयद अब्दुल रहीम का किरदार निभाते हुए दिख रहे हैं।

Q3. फिनलैंड में भारतीय टीम किस वजह से युगोस्लाविया से हारी थी?

जूतों के ना होने की वजह से भारतीय टीम फिनलैंड में युगोस्लाविया से बहुत ही खराब आंकड़े से हारी थी।

Q4. सैयद अब्दुल रहीम की मृत्यु कब हुई थी?

सैयद अब्दुल रहीम की मृत्यु 11 जून 1963 की हुई थी।