(Sherni ka Teesra Putra) आज हम लोग इस आर्टिकल में शेरनी का तीसरा बच्चा इस कहानी के बारे में जानकारी हासिल करेंगे। अपने बचपन में कभी ना कभी पंचतंत्र की कहानी है तो जरूर सुनी होगी हम सभी ने अपने बचपन मैं पंचतंत्र की कहानी सुनी होती है लेकिन आगे चलकर हम उस कहानी को भूल जाते हैं और आज उस कार्य को फिर से पढ़ने के लिए हमें गूगल का सहारा लेना पड़ता है।

तो अगर आपने भी इस कहानी को पढ़ा है तो कहीं ना कहीं आपको भी यह कहानी याद होगी अगर याद नहीं है तो कोई बात नहीं आज मैं आपको शेरनी का तीसरा बच्चा इस गाने के बारे में बताऊंगा और सिर्फ इस कहानी के बारे में बताऊंगा ही नहीं बल्कि आपको इस कहानी से क्या सीख मिल सकती है वह भी बताऊंगा।

दोस्तों कहानी सुनना कोई बड़ी बात नहीं है सभी लोग कार्य सुनते हैं लेकिन उस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है वह सबसे बड़ी महत्वपूर्ण बात होती है इसलिए अगर आप कोई भी कहानी सुनते हो तो हमेशा उस कहानी से जो भी सीख मिले उसे सीखो और उसे अपने जीवन में उतार लो।

अगर ऐसा करना अपने शुरू कर दिया तो आपके जीवन में बहुत सारे समस्या का समाधान आपके सामने होगा क्योंकि यह सारे कहानी कहीं ना कहीं हमें कुछ सिखाने के लिए लिखी जाती है जो भविष्य में हमारे बहुत काम आती है तो ज्यादा देर ना करते हुए आइए हम इस गाने के बारे में जानते हैं।

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शेरनी का तीसरा बच्चा | Sherni ka Teesra Putra

एक जंगल मे एक शेर और एक शेरनी रहते थे। दोनों में बड़ा प्रेम और विश्वास था। दोनो एक साथ शिकार करते और जो कुछ भी उन्हें मिलता वे आपस मे बांट कर खा लेते थे। पूरे जंगल में उनका बोलबाला था। उनके दिन बहुत अच्छे कट रहे थे। इसी बीच शेरनी ने दो बेटों को जन्म दिया। बच्चों के जन्म के बाद वह काफी कमजोर हो गई थी। साथ ही दोनों बच्चे भी काफी छोटे थे, इसलिए शेर ने उससे कहा

“तुम घर पर रहकर हो आराम करो और बच्चों की देखभाल करो। मैं अकेला ही शिकार पर जाऊंगा, और तुम्हारे और बच्चों के लिए भोजन का इंतेजाम करूँगा।”

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शेर शिकार पर जाता और शेरनी घर पर ही उसका इंतजार करती। एक दिन की बात है, दुर्भाग्य से शेर को उस दिन एक भी शिकार न मिला। निराश होकर वह थका हारा वापस आ रहा था। रास्ते में उसे एक लोमड़ी का बच्चा घूमता हुआ मिला। शेर ने सोचा आज इसे ही अपना शिकार बनाऊंगा। लेकिन उसने उसे मारा नहीं बल्कि उठा ले आया। घर आकर उसने शेरनी से कहा 

“आज यही हाथ लगा है, लो इसे मारकर तुम सब खा लो” उस छोटे से बच्चे को देखकर शेरनी को उस पर दया आ गई। उसने शेर से कहा “जब तुम ही इसे न मार पाए तो मैं किस प्रकार इसे मार सकती हूँ। यह भी तो हमारे बच्चों जैसा ही है। आज से यह हमारा तीसरा बेटा है।”

शेर भी इस बात पर बहुत खुश हुआ। तीनों बच्चे एक साथ बड़े होने लगे। उनमें आपस मे कोई भेद न था। वे एक साथ खेलते और एक साथ शिकार को जाते। बड़े होने पर उन्हें इस बात का पता भी न था कि उनका छोटा भाई उनसे अलग है। एक दिन वे तीनों जंगल मे खेल रहे थे। अचानक उन्हें एक हाथी का बच्चा दिखा। दोनों शेर भाई उनका शिकार करने के लिए उनके पीछे दौड़े। लोमड़ी का बच्चा उन्हें ऐसा करने से मना करने लगा। लेकिन वे उस हाथी के पीछे चले गए और वह वापस शेरनी के पास आ गया। 

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जब दोनों भाई वापस आए तो उन्होंने अपनी माँ को इस बारे में बताया और उसका मजाक उड़ाने लगे। इस पर लोमड़ी के बच्चे को गुस्सा आ गया। उसने कहा “तुम्हें क्या लगता है मैं डरपोक हूँ। मैं चाहूं तो अभी तुम दोनों को यहीं पटक सकता हूँ।”

शेरनी ने उसे समझाया कि अपने भाइयों से ऐसे बात नही करनी चाहिए। वह उसे अपने साथ ले गई और उसे उसके लोमड़ी होने का सच बताया। शेरनी ने उससे कहा “तुम्हारे भाइयों को इस बात का पता भी नहीं है, अगर उन्हें सच्चाई पता चली तो वे तुम्हें भी मार कर कहा जाएंगे। इसलिए तुम चुप चाप यहां से भाग जाओ।”

लोमड़ी का बच्चा इस बात को जानने के बाद रात में वहां से अपनी जान बचाकर चुप चाप भाग गया।

इस कहानी की सीख

यह कहानी हमें यह सीख देती है कि साथ रहने मात्र से किसी की जाती, जन्म और व्यवहार में कोई परिवर्तन नही होता। वह अपनी वास्विकता नहीं खो सकता। मुझे पूरा आशा है कि आप को इस कहानी से यह सीख जरूर मिला होगा तो आपको अब से अपने जीवन में इसी को उतारना है।

ताकि आपको जीवन और भी ज्यादा आसान बन जाए अगर आप इस कहानी से कुछ नहीं सीख पाते हैं तो कहीं ना कहीं आप ही गलती होगी क्योंकि सीख हमें हर जगह मिलती है हमें बस सीखने की जरूरत होती है तो आप इस गाने को सुने और इससे मिली सीख को अपनी जीवन में उतारे।

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