Sam Manekshaw Biography in Hindi : नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने वाले हैं सैम मानेकशॉ के जीवन परिचय के बारे में हमारे देश में इतने सारे महापुरुषों ने अपनी बलिदान दी है यदि किसी को पता होगा और इन्हीं सारी सैनिकों के बदौलत हम आज अपने भारत देश में चैन की नींद ले पाते हैं ।

अगर वह सारे सैनिकों ने अपनी बलिदान नहीं दी होती तो शायद ही हम आज स्वतंत्र से जी पाते हैं। में बात कर रहा हूं सैम मानेकशॉ के बारे में इन्होंने हमारे भारत देश के लिए कई बलिदान दी हैं जिसकी वजह से आज उन्हें याद किया जाता है.

अगर इन सारे योद्धा हमारे भारत देश के लिए नहीं लड़ते हैं तो शायद आज हमारा इतिहास कुछ और ही होता आज मैं आपको ऐसे महापुरुष के बारे में बताने वाला हूं जो 1971 के युद्ध में अपना सहयोग देकर हमारे देश को जीता था।

भारत की इसी लड़ाई के परिणाम से एक नए राष्ट्र की शुरुआत हुई थी यानी कि बांग्लादेश की शुरुआत हुई थी।

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मैं आपको बता दूं सैम मानेकशॉ का पूरा नाम सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ है और यह एक ऐसे इंसान हैं, एक ऐसे योद्धा हैं जिनके कारण हमारा देश ऐसे कई सारे ऐतिहासिक लड़ाई को जीत कर आजादी पाया है।

सैम मानेकशॉ एक ऐसे योद्धा रहे हैं जो ऐसे न जाने कई सारे ऐतिहासिक युद्ध के गवाह रहे हैं इन्होंने अपने आंखों से बहुत सारे युद्ध को देखा है और उसमें से ऐसे कई सारे युद्ध है जिनमें सैम मानेकशॉ अपना सहयोग देकर हमारे देश के लिए लड़ा है।

मैं आपको बता दूं सन 1939 में जब द्वितीय विश्व वर्ल्ड की शुरुआत हुई थी और यह युद्ध तकरीबन 6 साल तक चला था इसकी समाप्ति 2 सितंबर 1945 को हुई थी इस युद्ध में भी सैम मानेकशॉ का बहुत महत्वपूर्ण सहयोग रहा था।

सैम मानेकशॉ का जन्म 13 अप्रैल 1914 को पंजाब के एक शहर अमृतसर में हुआ था। सैम बहुत ही महान पुरुष है वह बहुत ही खुले विचारों वाले व्यक्ति थे मैं आपको एक घटना बताता हूं इंदिरा गांधी जो कि वहां की तत्काल प्रधानमंत्री भी थी वह सैम से नाराज हो गई थी।

क्यों हो गई थी? क्योंकि एक बार सैम मानेकशॉ ने इंदिरा गांधी जी मैडम को मैडम कहने से मना कर दिया था इस वजह से इंदिरा गांधी जी सैम मानेकशॉ से नाराज हो गई थी सैम ने यह भी कहा था कि जितने भी संबोधन शब्द का प्रयोग केवल ऐसी खास वर्गों के लिए ही प्रयोग करना चाहिए.

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मैं आपको इस लेख में इस महापुरुष के बारे में ऐसे ऐसे बातें बताऊंगा जिनके बारे में आपको जानकर हमारे देश पर गर्व होगा कि हमारे देश से भी ऐसे ऐसे वीर सैनिक निकले हैं जिन्होंने अपने आपको भारत देश के लिए पूरा समर्पण कर दिया।

Sam Manekshaw Biography in Hindi – Age, Date of Birth, Caste, Wife, Awards, Dead Date

Sam Manekshaw Biography

Quick Information About Sam Manekshaw Biography in Hindi

परिचय बिंदु (Introduction Points)परिचय (Introduction)
पूरा नाम (Full Name)सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ
निक नेम (Nick Name)सैम बहादुर
जन्म (Birth Date)3 अप्रैल, 1914
जन्मस्थान (Birth Place)अमृतसर, पंजाब, भारत
मृत्यु (Dead Date)27 जून, 2008
मृत्युस्थान (Dead Place)वेलिंगटन, तमिलनाडु
पत्नी का नाम (Wife Name)सिल्लो मानेकशॉ
वैवाहिक स्थिति (Marital Status)वैवाहिक
पेशा (Profession)भारतीय सैन्य सेवा
पुरस्कार (Awards)पद्म भूषण, पद्म विभूषण, भारत के पहले फील्ड मार्शल बने थे
विशेषण योगदान (Special Contributions)1971 के युद्ध मैं पाकिस्तान की पराजय और बांग्लादेश जैसे नए राष्ट्र का शुरुआत
जाति (Caste)फारसी
आयु (Age)94
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय

सैम मानेकशॉ की शिक्षा (Sam Manekshaw Education)

सैम मानेकशॉ अपनी प्रारंभिक शिक्षा पंजाब और नैनीताल से किया है। सैम मानेकशॉ शेरवुड कॉलेज से अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की है और कैंब्रिज बोर्ड के स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा में सैम मानेकशॉ ने डिक्टेशन हासिल किया है।

मैं आपको बता दूं सैम मानेकशॉ अपने बचपन में काफी शरारती थे। हालांकि इनके पिताजी जो कि एक चिकित्सक थे तो उन्हें देखकर सैम मानेकशॉ को भी बड़े होकर एक चिकित्सक बना था.

और बचपन से ही हो जाते थे कि वह चिकित्सक बने लोगों की मदद करें लोगों की मदद करने में उनका बहुत दिलचस्पी का वह बचपन से ही दूसरों की मदद किया करते थे और इसीलिए वह चाहते थे कि वह अपनी चिकित्सक की पढ़ाई लंदन से करें परंतु ऐसा ना हो सका उनके पिताजी ने सैम मानेकशॉ को लंदन से मना कर दिया।

सैम मानेकशॉ जी का प्रारंभिक जीवन (Sam Manekshaw Early life)

सैम मानेकशॉ एक पारसी परिवार में पैदा हुए थे। सैम मानेकशॉ का जन्म 3 अप्रैल 1916 को पंजाब के छोटे से शहर अमृतसर में हुआ था। सैम मानेकशॉ जी के पिताजी का नाम होर्मूसजी मानेकशॉ था जोकि अपने समय में एक चिकित्सक थे और इनके माता जी का नाम हीराबाई था जो कि एक हाउसवाइफ थी।

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जैसा कि मैंने आपको बताया सैम मानेकशॉ के पिताजी एक पिक सकते हैं और उनके पूरे परिवार गुजरात के वलसाड शहर से पंजाब आकर रहने लगे थे। सैम मानेकशॉ ने अपना प्रारंभिक शिक्षा पंजाब और नैनीताल में स्थित शेरवुड कॉलेज से पूरी की थी और कैंब्रिज बोर्ड के स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा में इन्होंने डिक्टेशन भी हासिल किया था।

मैंने आपको बताया था की सैम मानेकशॉ भी बड़े होकर एक चिकित्सक बनना चाहता है और वह पंजाब छोड़कर लंदन जाकर पढ़ाई करना चाहते थे लेकिन उनके पिताजी ने उन्हें जाने से मना कर दिया।

क्योंकि सैम मानेकशॉ के पिता जी का कहना था कि सैम अभी तुम बहुत छोटे हो क्योंकि जब सैम मानेकशॉ लंदन जाने की बात कर रहे थे तब उनकी उम्र महज 15 साल थी इतनी छोटी उम्र में लंदन जाना उनके पिताजी को सही नहीं लग रहा था इसलिए इन्होंने सैम को लंदन जाकर पढ़ाई करने के लिए मना कर दिया उन्होंने ऐसा कहा अभी तुम उम्र में बहुत छोटे हो इसलिए अभी तुमको थोड़ा समय लगेगा।

सैम अपने घर में सबसे छोटे थे मनीष के कोई पांच भाई थे सैम ने लंदन जाने की बात इसलिए की क्योंकि इनके सारे भाई लंदन में रहकर पढ़ाई करते थे इसलिए सैम को भी लंदन जाकर पढ़ने की इच्छा जगी लेकिन इनके पिता जी ने इन्हें मना करने के बाद सैम ने देहरादून से इंडियन मिलिट्री एकेडमी (Indian Military Academy) में प्रवेश परीक्षा के अंदर जाने का निर्णय लिया.

और वह उस परीक्षा में सफल भी हुई और इसी के साथ सैम मानेकशॉ 1 अक्टूबर 1932 को देहरादून से इंडियन मिलिट्री एकेडमी (Indian Military Academy) में अपना दाखिला कराएं और 4 फरवरी 1930 को ब्रिटिश इंडियन आर्मी में सैम मानेकशॉ सेकंड लेफ्टिनेंट बन गए और यहीं से मनीष की सेना वाला जीवन की शुरुआत हुई।

सैम मानेकशॉ का मिलिट्री करियर (Sam Manekshaw Military Career)

सैम मानेकशॉ जब ब्रिटिश आर्मी को ज्वाइन किए उसी के बाद इन्होंने करीबन चार दशक लंबा सैनिक जीवन बिताया और इसी के साथ सैम मानेकशॉ ने पाकिस्तान से तीन बार युद्ध और चाइना से एक बड़ा युद्ध के गवाह भी रह चुके हैं।

सैम मानेकशॉ ने अपने पूरे जीवन में ऐसे कई सारे महत्वपूर्ण पदों का कार्यभार संभाला है और 1969 के आखिरी समय में इनको भारत का आठवां सेना अध्यक्ष बनाया गया था और इसी के साथ साथ इसी कार्यकाल में सैम मानेकशॉ ने 1971 के पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना कि काम को संभाला था और इसी के साथ सैम मानेकशॉ से भारत के पहले फील्ड मार्शल के नाम से जानने लगे।

सेना में कमीशन के वक्त दौरान सैम मानेकशॉ को पहले द्वितीय बटालियन और इसके बाद “द रॉयल स्टॉक्स” (एक बेटी बटालियन कहते हैं) पदों को संभाला था और इसके बाद इनको चौथे बटालियन और फिर 12वीं फ्रंटियर फोर्स में अपना सहयोग देने के लिए सैम मानेकशॉ को अवसर भी प्रदान किया गया था।

सैम ने अपने सेना जीवन काल में ऐसे बहुत सारे पदों को हासिल किया है और हमारे भारत देश का नाम रोशन किया मैं आपको आगे सैम मानेकशॉ के अचीवमेंट के बारे में भी बताऊंगा इसलिए आगे तक बने रहे।

द्वितीय विश्व युद्ध (Second World War) में सैम मानेकशॉ का योगदान

सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान सैम मानेकशॉ 12 फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट का पूरा कार्यभार बर्मा में संभाला था और इन्होंने इस युद्ध स्थल पर बहुत ही वीरता भरा परिचय सबके सामने दिया था जिसके कारण सैम मानेकशॉ को सभी के सामने सम्मानित भी किया गया था।

जिस कंपनी में सैम मानेकशॉ अपना योगदान दे रहते हैं उस कंपनी के करीबन 50% से भी ज्यादा उनके सैनिक मारे जा चुके थे लेकिन सैम मानेकशॉ ने बहुत ही बहादुरी से जापानियों का मुकाबला किया और उनसे हाथ ना माना और इसी के साथ साथ उस युद्ध में अपनी जीत भी हासिल की।

क्या आपको पता है?

सैम मानेकशॉ जी एक ही युद्ध के दौरान बहुत ही बुरी तरह से घायल हो चुके थे इतनी बुरी स्थिति हो चुकी थी कि सभी को लगाकर अब इनकी मृत्यु नजदीक आ गई है लेकिन इसके बाद भी सैम मानेकशॉ जी ने अपना दम नहीं तोड़ा।

यह बात है एक महत्वपूर्ण स्थान “पगोड़ा हिल” की जहां पर इन्होंने युद्ध करने के दौरान अपने दुश्मन की धुआंधार गोलाबारी से बुरी तरह से जख्मी हो गए थे लेकिन उनके साथी सैम मानेकशॉ को उस युद्ध क्षेत्र से रंगून ले गए जहां पर उनका इलाज चला और इलाज चलने के बाद सैम जी धीरे धीरे ठीक होने की स्थिति में आ गए थे।

जब सैम मानेकशॉ जी को होश आया तब डॉक्टरों ने उनसे पूछा कि आपको क्या हो गया था तो सैम मानेकशॉ जी हंसते हुए यह कहा लगता है शायद किसी गधे ने मुझे लात मारा है।

डॉक्टर को यस सुनकर बहुत ही बड़ा झटका लगा क्योंकि जिस हालत में सैम मानेकशॉ डॉक्टर के सामने थे उस हालत में उनका बचना नामुमकिन था लेकिन इन सब के बावजूद भी उनका ऐसा कहना मानो ऐसा एक योद्धा ही कह सकता है डॉक्टरों ने सैम मानेकशॉ जी को ठीक किया और आगे की लड़ाई लड़ने के लिए हिम्मत दी।

भारत के आजादी के बाद भी सैम मानेकशॉ का हमारे देश के प्रति सेवा!

भारत जब आजाद हुआ था तब उसके बाद भी सैम मानेकशॉ हमारे देश के लिए बहुत तरह से सेवा की थी मैं आपको उनके मातृभूमि के प्रति सेवा के बारे में एक-एक करके विस्तार रूप से बताऊंगा और उसको जानकर आपको बहुत ही गर्व महसूस होगा तो चलिए जानते हैं।

● भारत देश की स्वतंत्रता के समय 1947 से 1948 के बीच में सैम मानेकशॉ जम्मू और कश्मीर पर चल रहे सभी अभियान पर निपुणता का भलीभांति से प्रदर्शन किया था।

● आर्मी के कमांडर पर प्रमोशन देने के लिए सैम मानेकशॉ जी को चुना गया और वह समय 1983 का था और इतना ही नहीं सैम मानेकशॉ जी को पश्चिमी कमांडर के रूप में भी जिम्मेदारी सौंपी गई।

● 1964 में, नागालैंड में चल रहे सभी प्रकार के आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए सैम मानेकशॉ जी को कहा गया और इस कार्य में सैम मानेकशॉ ने अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया और इसमें सफलता भी पाया इसका परिणाम स्वरूप सैम मानेकशॉ को 1968 में पद्म भूषण से नवाजा गया।

● सैम मानेकशॉ विभाजन से संबंधित जितने भी मुद्दे थे उन सब पर कार्य करते हुए अपनी बुद्धिमानता और कुशलता का भली-भांति परिचय दिया है और इतना ही नहीं दोस्तों भारत देश के शासन निर्माण में भी सैम मानेकशॉ ने अपना बहुत बड़ा योगदान दिया।

Sam Manekshaw Awards and Achievements

मैं आपको बताऊंगा कि वह कौन-कौन से पुरस्कार है जो सैम मानेकशॉ को उनके राष्ट्र सेवा के लिए सम्मानित किया गया था इस महापुरुष को मिलने वाले उपलब्धियां कुछ इस प्रकार है –

● पद्मभूषण
● पद्म विभूषण
● फील्ड मार्शल

Sam Manekshaw Biopic Film

सैम मानेकशॉ जी के जीवन पर आधारित एक मूवी आने वाली है जिसमें विकी कौशल सैम मानेकशॉ जी का किरदार निभाने वाले हैं यह फिल्म कुछ ही समय के बाद आपको सारे सिनेमाघरों में दिख जाएगा।

इस बेहतरीन को डायरेक्ट करने वाले हैं बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर मेघना गुलजार और इस फिल्म के कवि मेघना गुलजार, भावनी आइए और शांतनु श्रीवास्तव जी हैं। इस मूवी के बारे में अब तक तो कोई अपडेट नहीं आया लेकिन जैसे ही कोई अपडेट आता है मैं आप लोग के सामने जरूर लाऊंगा इसलिए यह जरूरी है कि आप लोग हमारे साथ बने रहें ताकि आप हर नई अपडेट के बारे में जल्द से जल्द जान पाए।

FAQ on Sam Manekshaw Biography in Hindi

Q1. भारत के प्रथम फील्ड मार्शल कौन थे?

भारत के प्रथम फील्ड मार्शल (Known as First Field Master) सैम मानेकशॉ जी थे।

Q2. सैम मानेकशॉ जी के पिताजी का नाम क्या है?

सैम मानेकशॉ जी के पिताजी का नाम होर्मूसजी मानेकशॉ है।

Q3. सैम मानेकशॉ का जन्म कब और कहां हुआ था?

सैम मानेकशॉ का जन्म 3 April 1914, को अमृतसर, पंजाब में हुआ था।

Q4. सैम मानेकशॉ जी का मृत्यु कब और कहां हुआ था?

सैम मानेकशॉ का मृत्यु 27 जून 2008 को निमोनिया के कारण वेलिंगटन तमिल नाडु में हुआ था।