नमस्कार दोस्तों! आज के इस लेख में मैं आपको दिवाली के दिन कौन सी कथा ( diwali katha in hindi) पढ़ने से माता लक्ष्मी की कृपा हम पर बनी रहती है वह बताने वाला हूं इसलिए इस लेख को अंत तक पढ़े।

दिवाली का त्यौहार आने वाला है आप सभी को पता है दिवाली का त्यौहार हम हिंदुओं के लिए बहुत ही बड़ा त्योहार माना जाता है हम इस त्यौहार को कई वर्षों से मनाते आ रहे हैं अपने परिवार के साथ अपने दोस्तों के साथ इस त्यौहार का आनंद उठाते आ रहे हैं।

जैसे दिवाली का त्यौहार आता है सभी लोग माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए उनकी कृपा पाने के लिए बहुत से पूजा कथाएं कराने में लग जाती है क्योंकि मां लक्ष्मी धन की देवी है सभी चाहते हैं कि उनके घर में धन की वृद्धि हो।

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यही वजह है कि माता लक्ष्मी जी का आरती होता है उनकी कथाएं कराई जाती है। माता लक्ष्मी धन, सुख समृद्धि की प्रतीक है सभी लोग महालक्ष्मी की कृपा जाते हैं आज मैं आपको कथाएं का महत्व बताऊंगा।

आज मैं आपको उन कथाएं के बारे में बताऊंगा जिनसे माता लक्ष्मी का वास होता है माता लक्ष्मी हमारे घर प्रकट लेती है और अपना आशीर्वाद हम सब पर बनाए रहती है।

इसी के साथ साथ में आपको दिवाली पर पूजन के लिए कौन-कौन सी सामग्री की जरूरत पड़ती है वह सभी बताऊंगा और दिवाली की पूजा की तैयारी कैसे करें वह भी बताऊंगा।

Diwali katha in Hindi – दिवाली त्यौहार की कथाएं हिंदी में

Diwali katha in Hindi

हमारे भारत देश में बहुत सारे त्योहारों को मनाया जाता है लेकिन दिवाली उनमें से सबसे अहम त्यौहार है क्योंकि दिवाली हम त्यौहार बनने के पीछे कुछ ऐसी ऐतिहासिक रचनाएं हैं इनके बारे में आप लोगों को जानना बहुत जरूरी है।

वैसे तो हमारे बड़े बुजुर्ग को दिवाली की कथाएं या फिर इतिहास बताने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन आज के हमारे युवा पीढ़ी दिवाली की इतिहास के बारे में भूल चुके हैं उनको नहीं पता कि दीवाली पर्व इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

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नेपाली पर्व को मनाने का पीछे कारण क्या है इसलिए आज मैं आपको इसके इतिहास के बारे में बताऊंगा कि आखिर हम क्यों दिवाली पर हो इतना महत्व देते देते हैं यह तो धूमधाम से मनाते हैं।

भगवान राम का अयोध्या लौटना

दोस्तों दिवाली पर्व को मनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण तो यही है कि हमारे भगवान श्री राम जब रावण का वध करके वापस अपने अयोध्या लौट रहे थे तब उनकी आने की खुशी में खूब सारे दिए जलाए गए थे।

भगवान श्री राम की आने की खुशी में पूरा अयोध्या नगरी जगमगआ उठाता था। जिस दिन प्रभु श्री राम अयोध्या लौट रहे थे वह दिन अमावस्या का दिन था उस अमावस्या की काली रात में अयोध्या के वासी जी के दीए जलाकर पूरा अयोध्या को रोशनी से भर दिए थे।

उस दिन से दिवाली के पर्व को मनाने का प्रथा शुरू हुआ उस दिन से लेकर आज तक दिवाली का पर्व भगवान श्री राम के लौटने की खुशी में ही मनाया जाता है और आज भी लोग यही सोचकर दिवाली को बहुत धूमधाम से मनाते हैं।

राजा और लकड़हारे की कथा

एक दिन की बात है एक गांव में एक राजा हुआ करता था और उसी गांव में एक लकड़हारा भी रहा करता था एक दिन लकड़हारे के काम को देखकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और लकड़हारे को एक चंदन की लकड़ी का जंगल भेंट में दे दिया।

पर लकड़हारा बुद्धि से कमजोर था उसे बुद्धि का इस्तेमाल करना नहीं आता था क्योंकि लकड़हारा को बस लकड़ी काटने आता था। उसे चंदन की लकड़ी का जंगल का महत्व क्या होता है कैसे मालूम होता वह तो जंगल से चंदन की लकड़ियां काटकर लाता और उसे जलाकर अपने लिए भोजन बनाता।

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रोज लकड़हारा चंदन की लकड़ी आपने घर लाता और उसे चलाकर अपने लिए भोजन बना था एक दिन राजा को उसके सैनिक ने यह सारी घटना विस्तार रूप से बताएं तब राजा ने सोचा की हाथ में था ना होने से कोई भी इंसान धनी नहीं बन जाता

उस धनी का सही से उपयोग करना भी बहुत महत्वपूर्ण है उसके लिए भी बुद्धिमान व्यक्ति की जरूरत होती है और कहीं ना कहीं यही कारण है कि दिवाली के पर्व के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान श्री गणेश जी की भी पूजा होती है।

ताकि इंसान को धन के साथ-साथ बुद्धि भी मिले इंसान अपने धन को अच्छी तरीके से उपयोग कर सकें और धन का बुरा इस्तेमाल ना कर सके इसलिए दिवाली के दिन दोनों भगवान की पूजा कराई जाती है।

भगवान श्री कृष्ण और नरकासुर की कथा

दिवाली के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया था। नरकासुर पोथी तुम पूरा राक्षस था वह पृथ्वी लोक पर अपना दहशत फैलाना चाहता था पर सभी को डरा कर अपने नीचे रखना चाहता था।

इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने दिवाली के लिए नहीं देखा सर को युद्ध में हराया उनका वादा किया और यही कारण है कि बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में दिवाली का त्यौहार को मनाया जाता है।

साहूकार की बेटी और माता लक्ष्मी की कथा

एक दिन की बात है यह गांव में साहूकार रहता था और उसकी बेटी भी थी उसकी बेटी रोज एक पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाने जाती थी जिस पीपल के पेड़ पर सरकार की बेटी जल चाहने जाती थी उस पीपल के पेड़ पर माता लक्ष्मी का वास था।

साहूकार की बेटी रोजाना उस पीपल पर जल चढ़ाते थी तो एक दिन पीपल के पेड़ से माता लक्ष्मी जी की आवाज आती है कि मैं तुम्हारी सहेली बनना चाहती हूं क्या तुम मेरी दोस्त बनोगी तब साहूकार की बेटी ने उत्तर दिया कि मैं अपने पिता जी से पूछ कर बताती हूं।

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उसी दिन सरकार की बेटी अपने घर गई और तुरंत अपने पिताजी से पूछा कि पीपल के पेड़ से माता लक्ष्मी जी ने मुझे अपनी सहेली बनने का अवसर दिया है तो यह सुनते हैं सरकार ने तुरंत हां करने की अनुमति दे दी और अगले दिन ही सरकार की बेटी माता लक्ष्मी की सहेली बन गई।

इसके बाद फिर दोनों में मित्रता काफी अच्छे हो गई फिर एक दिन माता लक्ष्मी जी ने सरकार की बेटी को अपने घर बुलाया इसके बाद माता लक्ष्मी जी ने सरकार की बेटी स्वागत बहुत ही अच्छे से किया।

साहूकार की बेटी को माता लक्ष्मी जी ने खूब अच्छे से गद्दारी की बहुत ही अन्य अन्य प्रकार के व्यंजन खिलाएं और बहुत सारी तोहफे भी दिए इसके बाद फिर सरकार की बेटी वापस अपने घर लौटने के लिए निकल रही थी तभी माता लक्ष्मी जी ने उनसे पूछा कि तुम मुझे अपने घर कब बुला रही हो।

यह सुनते ही सरकार की बेटी थोड़ी उदास हो गई और अपने घर लौट आई। जब सरकार ने अपनी बेटी को उदास देखा तो उससे पूछा कि तुम उदास हो यह तो बहुत खुशी की बात है कि तुमने माता लक्ष्मी को हमारे घर आमंत्रित किया है।

तभी साहूकार की बेटी ने अपने पिता को जवाब दिया कि मैं उदास किसलिए हूं की मैं जब माता लक्ष्मी के घर गई तो उन्होंने मेरा बहुत ही अच्छे से स्वागत किया लेकिन मेरे घर की स्थिति अच्छी नहीं है मैं उनका स्वागत कैसे करूंगी।

यह सुनते ही सरकार ने अपनी बेटी को समझाया और बोला हमारे पास जो भी है उनसे ही हम उनका अच्छे से स्वागत करेंगे तुम जल्दी से मिट्टी से चौका लगाकर साफ सफाई कर दो घर में चारों तरफ दिया जलाओ और लक्ष्मी जी का नाम लेती रहो।

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कुछ ही समय के बाद एक झील किसी महारानी का नौलखा हार लेकर साहूकार की बेटी के पास चोर जाता है उसी वक्त साहूकार की बेटी ने नौलखा हार को बेचकर अच्छे-अच्छे पकवान की तैयारी करनी शुरू कर दी।

कुछ समय बाद माता लक्ष्मी और भगवान श्री गणेश जी साहूकार के घर आए तब सरकार और उसकी बेटी दोनों मिलकर दोनों भगवानों की बहुत ही अच्छे से सेवा की अच्छे-अच्छे पकवान खिलाएं इस वजह से भगवान श्री गणेश और माता लक्ष्मी काफी ज्यादा प्रसन्न हुई और साहूकार को बहुत ही धनी व्यक्ति बना दी।

दिवाली पर्व मनाने की सामग्री मैं क्या-क्या होनी चाहिए

दिवाली पूजन एक बहुत ही महत्वपूर्ण पूजन है इसमें आपको बहुत ही ध्यान से माता लक्ष्मी जी की और गणेश भगवान की पूजा करनी होती है मैं आपको कुछ ऐसी सामग्री बताऊंगा तो इनका उपयोग आप दिवाली के दिन पूजा के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।

मां लक्ष्मी पूजा के लिए आपके घर मैं जो सामग्री होनी चाहिए वह कुछ इस प्रकार है :

  • केसर 
  • रोली 
  • चावल 
  • पान का पत्ता 
  • सुपारी
  • फल 
  • फुल 
  • दूध
  • खील 
  • बताशे 
  • सिंदूर
  • सूखे मेवे 
  • मिठाई 
  • दही 
  • गंगाजल 
  • धूप 
  • अगरबत्ती दीपक रुई 
  • कलावा

नारियल और कलस के लिए तांबे का पत्र अपने घर में जरूर रखें। यह सारी सामग्री दिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश जी की पूजा के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

तो इन सामग्री का आप अपने घर में जरूर से रखें ताकि आपका पूजा काफी अच्छा हो और भगवान आपके घर में आए और अपना आशीर्वाद दें।

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दिवाली पूजन की तैयारी बहुत ही अच्छी तरह से होनी चाहिए क्योंकि भगवान की कथाएं भगवान का पूजन मजाक नहीं होता जितना अच्छा आप पूजा करेंगे जितनी मन से जितनी श्रद्धा से आप अपने भगवान के लिए पूजा करेंगे भगवान उतनी ही श्रद्धा से आपके पास आएंगे अपना आशीर्वाद देंगे।

इसलिए अपने घर को साफ रखें पर अपने मन को भी साफ रखें ताकि भगवान आपके द्वार पर आए और अपना आशीर्वाद देकर जाए दिवाली के दिन आप अच्छे-अच्छे पकवान बना सकते हैं खूब सारी मिठाई बना सकते हैं और अपनों को अपने घर बुलाकर उनका स्वागत अच्छे से कर सकते हैं।

Conclusion 

दिवाली का त्यौहार बहुत ही पावन त्यौहार है इस्तेमाल को आप जितनी श्रद्धा से मनाएंगे आपको उतना ही मिलेगा इज्जत सभी लोग नए नए कपड़े पहन कर साफ सफाई करके अपने घरों को सजाते हैं ताकि माता लक्ष्मी जी का हमारे घरों में आगमन हो और हम सभी को अपना आशीर्वाद दें।

इस त्यौहार के दिन सभी घरों में अच्छे-अच्छे पकवान बनते हैं क्योंकि अच्छा पकवान सभी को पसंद है या तक हमारे भगवान जी को भी पसंद है भगवान जी भी अच्छे-अच्छे पकवान खाते हैं और वह चाहते हैं कि उनकी जितने भी भक्त हैं।

वह सब उनके लिए अच्छे से पकवान बनाएं और खुद भी खाएं हमें भी खिलाएं। जरूरी नहीं है कि आपको बहुत अच्छे से धूमधाम से मनाना है तभी भगवान आप पर अपना आशीर्वाद देंगे ऐसा नहीं है आपके पास जो भी है।

उनसे आप दिवाली मना सकते हैं अगर आपके पास ज्यादा व्यवस्था नहीं है तो आपके बस इतना है आप कितने से बना सकते हैं भगवान कभी भी अमीर गरीब नहीं देखता वह बस श्रद्धा देखता है वह बस मन देखता है।

आपके पास अगर पैसा नहीं है तो चलेगा लेकिन आपके पास सच्चे मन और श्रद्धा होनी चाहिए तभी भगवान आपके पास आएंगे और अपना आशीर्वाद देंगे इसलिए हमेशा अपने मन को साफ रखें और भगवान को मनाने के लिए उनके लिए पूजा करें, हैप्पी दिवाली।