Sardar Udham Singh Biography in Hindi : आज हम बात करने वाले हैं सरदार उधम सिंह के बारे में सबसे पहले हम भी जानते हैं कि सरदार उधम सिंह है कौन?

उधम सिंह एक भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने ब्रिटिश भारत में पंजाब के भूतपूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर सर माइकल ओ. डायर की हत्या की थी और इसी के लिए वह जाने भी जाते हैं।

सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को एक सिख परिवार पंजाब के शहर में हुआ था। उत्तम सिंह पंजाब के शहर के संगरूर जिले एक छोटे से गांव सुनम के रहने वाले थे। उधम सिंह ने सर माइकल ओ. डायर की हत्या 13 मार्च 1940 को की थी और ऐसे लोग कहते हैं कि यह हत्या उधम सिंह ने 1919 में अमृतसर में हुई जालियांवाला बाग नरसंहार का बदला लेने के लिए किया था।

हमारे भारतीय स्वतंत्रा अभियान मैं उधम सिंह का नाम सबसे पहले आता है और पंजाब के जिस गांव के उधम सिंह रहने वाले थे वहां के लोग उन्हें शहीद-ए-आजम सरदार उत्तम सिंह के नाम से भी बुलाते थे। दोस्तों मैं आपको बता दूं अक्टूबर 1995 में मायावती सरकार ने उत्तराखंड के एक जिले का नाम (उधम सिंह नगर) उधम सिंह के नाम पर भी रखा था।

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उधम सिंह के जन्म होने के 2 साल बाद ही उनकी माता जी का देहांत हो चुका था जब वह बहुत छोटे थे और धीरे-धीरे जब वह बड़े होते गए उनके 8 साल के उम्र में उनके पिताजी सरदार तेहाल सिंह जम्मू जो कि एक रेलवे में कर्मचारी थे उनका भी देहांत हो चुका था।

सिर्फ 8 साल की उम्र मैं अपने माता पिता को खो देना एक बच्चे के लिए बहुत ही दुख की बात होती है उधम सिंह केवल 8 वर्ष के थे जब उनके सर से उनके माता पिता का साया उठ चुका था।

आपको बता दूं उधम सिंह जी भगत सिंह के राह पर चलने बालों में से थे उन्होंने भगत सिंह की रास्तों को चुना और उनके राह पर चलें मैं आपको आगे उधम सिंह के बारे में और भी जानकारी दूंगा और इनकी द्वारा किए गए जितनी भी गतिविधियां है आज हम उन सब के बारे में जानेंगे और इन्होंने सर माइकल ओ. डायर को क्यों मारा था यह भी हम जानेंगे चलिए जानते हैं उधम सिंह की जीवन परिचय।

Sardar Udham Singh Biography in Hindi – Age, Birth Date, Profession, Marital Status, Caste

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Quick Information About Udham Singh Biography in Hindi

परिचय बिंदु (Introduction Points)Introduction 
पूरा नाम (Full Name)शहीद-ए-आजम सरदार उधम सिंह
पिता का नाम (Father Name)सरदार तेहाल सिंह जम्मू
माता का नाम (Mother Name)माता नारायण कौर
जन्म (Birth Date)26 दिसंबर 1899
जन्मस्थान (Birth Place)सुनाम, संगरूर जिला, पंजाब
पेशा (Profession)भारतीय क्रांतिकारी
राजनीतिक पार्टी (Political Party)गदर पार्टी, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन
उम्र (Age)40 साल
बालों का रंग (Hair Color)काला
धर्म (Religion)हिंदू
वंश (Genus)कंबोज
जाति (Caste)सिंह
वैवाहिक तिथि (Marital Status)अनमैरिड
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय

माता पिता की मृत्यु के बाद उधम सिंह काफी अकेले हो गए थे तब उनके बड़े भाई मुक्ता सिंह ने उधम सिंह को अमृतसर के खालसा अनाथालय में दाखिला कराया था और सरदार उत्तम सिंह का बचपन में तो ऐसे शेर सिंह नाम था लेकिन जब वह अनाथालय गए तब वहां पर उनको दीक्षा संस्कार देकर उनका नाम उधम सिंह दिया गया।

उत्तम सिंह 1918 में अपने मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद उसके अगले साल है उन्होंने अनाथालय को छोड़ दिया था।

माता पिता के जाने के बाद उधम सिंह अपने बड़े भाई मुक्ता सिंह के साथी अमृतसर के खालसा अनाथालय में रहा करते थे लेकिन दुख की बात यह है कि उधम सिंह के बड़े भाई जिनका नाम मुक्ता सिंह था वह भी उनके साथ ज्यादा समय तक नहीं रह पाए थे उनके बड़े भाई की भी मृत्यु हो गई थी बड़े भाई की मृत्यु 1917 में हुई थी।

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पंजाब में तिंवरी राजनीति में मची उथल-पुथल के बीच में उत्तम सिंह अकेले पड़ गए थे लेकिन उधम सिंह इन सारी गतिविधियों को अच्छी तरह से जानते थे और इनसे अच्छी तरह से रूबरू भी थे।

उधम सिंह का प्रारंभिक जीवन (Early Life)

उधम सिंह का जन्म पंजाब के छोटे से गांव सोनम में हुआ था उनका नाम बचपन से उत्तम सिंह नहीं था उनका बचपन से नाम शेर सिंह था लेकिन जब वह माता पिता के गुजर जाने के बाद पंजाब के खालसा अनाथालय में गए तब वहां उनका नाम उधम सिंह रखा गया।

उनकी पिताजी सरदार टेहाल सिंह कंबोज में उस समय एक प्रोस्की गांव में रेलवे क्रॉसिंग पर एक चौकीदारी के रूप में काम करते थे और उधम सिंह के माता नारायण कौर जो कि एक गृहिणी थी।

उत्तम सिंह के एक भाई भी थे जो कि उनसे बड़े थे उनका नाम मुक्ता सिंह था माता पिता के गुजरने के बाद उनके बड़े भाई ने उनका देखभाल रखा उनका ख्याल रखा।

पिताजी के गुजरने के बाद दोनों भाई पंजाब के खालसा अनाथालय में आगे का जीवन व्यतीत करने के लिए चले गए थे और अपनी शिक्षा दीक्षा लेने के लिए इस अनाथालय में उन दोनों भाई को रहना पड़ा लेकिन दुख की बात यह है कि उत्तम सिंह के बड़े भाई ने भी उनका साथ छोड़ दिया उनके बड़े भाई की मृत्यु 1917 में हो गई थी इसके बाद उधम सिंह पंजाब की खालसा अनाथालय में अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी करके वहां से अगले साल निकल गए थे।

जलियांवाला बाग नरसंहार घटना (Jallianwala Bagh Massacre Incident in Hindi)

13 अप्रैल 1999 एक ऐसा दिन था जिस दिन उत्तम सिंह ने कर्नल डायर को मारने का मन बनाया था उस दिन ऐसा क्या हुआ था? दोस्तों उस दिन वैशाखी का दिन था जो कि एक सीख पंजाबियों के लिए बहुत ही बड़ा त्यौहार होता है और नए साल का पहला दिन होता है इस खुशी में वहां के गांव के आसपास के लोग जशन मना रहे थे

और हजारों लोगों ने अमृतसर में बैसाखी का उत्सव हो रहा था उसके लिए इकट्ठा हुआ था। इस दिन मेले के बंद होने के बाद बहुत सारे लोग जलियांवाला बाग में बहुत बड़े जगह में एक सार्वजनिक उद्यान में सभा संबोधन के लिए सब लोग इकट्ठा हुए थे और उनके आसपास चारों तरफ एक दीवार से ढाका था।

कर्नल रेजीनाल्ड डायर ने सबको पहले ही बैठकों के लिए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया था लेकिन आम जनता को इसके प्रतिबंध के बारे में कुछ नहीं पता था और वहां पर उन लोगों ने भीर इकट्ठा कर ली थी।

इसी के बाद जलियांवाला बाग में सभा की बात सुनकर कर्नल डायर ने अपने सैनिकों के साथ मार्च करने के बारे में सोचा और अपने सैनिकों को यह कहा कि बाहर निकलने वाले सारे द्वार को बंद कर दिया जाए। हरिद्वार बंद होने के बाद कर्नल डायर ने अपने सैनिकों के साथ वहां मौजूद सारे लोगों पर अंधाधुंध गोली चलाना शुरु कर दिया उन लोगों में पुरुष, महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सभी थे।

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इस दिल जलाने वाले घटना को उधम सिंह ने अपने दिल और दिमाग में कैद कर लिया था जिससे उधम सिंह को काफी दुख पहुंचा और उसी समय उत्तम सिंह ने यह ठान लिया कि यह सब जिसके कारण हुआ है मैं उसको सजा दूंगा और उसी समय उधम सिंह ने यह प्रण ले लिया।

आधिकारिक ब्रिटिश भारतीय सूत्रों के अनुसार इस नरसंहार में 380 लोगों की मृत्यु हुई थी और 1100 लोग घायल हुए हो गए थे हालांकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह अनुमान लगाया है कि 1500 लोगों के साथ 1000 लोगों से ज्यादा लोगों की मृत्यु हुई थी।

उस दुखद दिन पर उधम सिंह उन सारे लोगों की मंडली को पानी पिलाने का काम कर रहे थे जो वैशाखी के त्यौहार के लिए आसपास के गांव से जलियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे कुछ लोगों का यह कहना है कि एक रतन देवी के पति के शव को निकालने के प्रयास में उत्तम सिंह को भी इस दुर्घटना में घायल कर दिया था।

उस दिन उस समय उधम सिंह के मन में बस एक ही विचार आ रहा था कि अब मुझे कर्नल डायर को उसकी किए की सजा देना है।

भगत सिंह जी के विचारों पर चलने वाले उधम सिंह थे!

उधम सिंह भगत सिंह के विचारों पर चलने वालों में से थे उधम सिंह भगत सिंह जी से काफी प्रभावित थे।

1935 मैं जब उधम सिंह तस्वीर में किसी काम के लिए गए थे तब उनको शहीद भगत सिंह की तस्वीरों के साथ पकड़ा गया था और उस समय के दौरान उत्तम सिंह को शहीद भगत सिंह का दोस्त मान लिया गया था और इसके साथ ही शहीद भगत सिंह का छात्र उधम सिंह को भी मांगा था।

उत्तम सिंह देश भक्ति गीत को बहुत ही सुना करते थे उनको देश भक्ति गीत से बहुत प्यार था वह हमेशा देश भक्ति गीत सुना करते थे उस समय के महान क्रांतिकारी कवि राम प्रसाद बिस्मिल जी के द्वारा लिखी गई भारतीय गीतों को उत्तम सिंह लगातार सुना करते थे और इनके वह काफी शौकीन भी थे।

माइकल ओ’ड्वायर (Michael o’dwyer) को गोली मारकर हत्या की गई

13 अप्रैल 1999 को घटित एक घटना जो कि जलियांवाला बाग नरसंहार में हुआ था उस घटना को उधम सिंह ने अपने दिल और दिमाग में कैद कर लिया था।

राजनीतिक कारणों से जलियांवाला बाग में मारे जाने वाले लोगों की संख्या अब तक सामने नहीं आई है बहुत सारे लोग का अनुमान यह है कि जलिया वाले बाग में बहुत सारे लोगों की मौत हुई थी इस घटना से हमारे वीर उधम सिंह बहुत ही ज्यादा दुखी तो थे और बहुत ही गुस्सा भी हुए थे और तभी उसी वक्त उन्होंने जलियांवाला बाग के आसपास की मिट्टी अपने माथे पर लकीर की तरह खींचा और यह प्रण लिया कि वह माइकल ओ डायर को सबक सिखाएंगे।

कर्नल डायर को मारने का प्लेन बनाने के बाद उधम सिंह ने अलग-अलग नामों से अफ्रीका, नैरोबी, ब्राजील और अमेरिका की यात्रा करना शुरू कर दी सन 1934 में उधम सिंह लंदन पहुंचे और वहां 9 अल्बर्ट स्ट्रीट कमर्शियल रोड पर घर लिया और वहां पर रहने लगे।

उधम सिंह ने यात्रा करने के लिए एक कार्य खरीदी और उसी के साथ कर्नल को मारने के लिए एक छह गोली वाला रिवाल्वर भी खरीदी थी। उधम सिंह कर्नल डायर को मारने के लिए एक उचित समय का अंतर इंतजार कर रहे थे और वह उचित समय बहुत ही जल्द आया।

उधम सिंह अपने सैकड़ों भाई बहनों की मौत का बदला लेने के लिए बहुत बेताब हो रहे थे और एक अच्छा समय ढूंढ रहे थे कर्नल को मारने के लिए और वह समय उनको 1940 में मिला। जलियांवाला बाग हत्याकांड की 21 साल के बाद उत्तम सिंह को अपना बदला पूरा करने का मौका मिला तारीख 13 मार्च 1940 को रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के एक हॉल में बैठक थी जहां कर्नल डायर को बुलाया गया था।

उधम सिंह उस दिन उस हॉल में समय से पहले ही पहुंच गए थे और वह बस अपने इंतजार में थे कि कर्नल कब आए और मैं कब उनको मारो उधम सिंह ने बहुत ही चालाकी से अपने रिवाल्वर को पुस्तक में छुपा लिया था पुस्तक के सारे पन्नों को रिवाल्वर के आकार में काट लिया था ताकि पुस्तक के अंदर रिवाल्वर आराम से आ जाए और किसी को पता भी ना चले।

सभी लोग बैठक मैं बैठे थे बैठक खत्म होने के बाद ही पीछे से उधम सिंह मोर्चा संभालते हुए माइकल ओ डायर पर गोलियां दाग दी 2 गोलियां माइकल ओ डायर को लगी जिससे उसकी वहीं पर तत्काल मौत हो गई।

उधम सिंह चाहते तो वहां से भाग भी सकते थे लेकिन उन्होंने वहां से भागने का निर्णय नहीं लिया और अपने आप को गिरफ्तार कर आया। 4 जून 1940 को उधम सिंह को कर्नल की हत्या का दोषी ठहराया गया और ठीक 31 जुलाई 1940 को उधम सिंह को पेंटनविले जेल में फांसी देने का ऐलान किया गया।

FAQ on Sardar Udham Singh Biography in Hindi

Q1. उधम सिंह के पिता का क्या नाम था?

उधम सिंह के पिताजी का नाम सरदार तेहाल सिंह जम्मू था।

Q2. उधम सिंह की मृत्यु कैसे हुई?

उधम सिंह की मृत्यु माइकल टायर को गोली मारकर हत्या करने के जुर्म में फांसी दी गई थी और इस वजह से उधम सिंह की मृत्यु हुई।

Q3. शहीद उधम सिंह जी की माता का क्या नाम था?

शहीद उधम सिंह जी की माता का नाम नारायण कौर था।

Q4. उधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ डायर को कब गोली मारी?

उधम सिंह ने लंदन में माइकल ओ डायर को 4 जून 1940 में गोली मारी थी।

Q5. शहीद उधम सिंह को फांसी कहां तथा किस देश में दी गई थी?

शहीद उधम सिंह को पेंटनविले जेल में लंदन में दी गई थी।