Sarabjit Singh Biography in Hindi | सरबजीत सिंह की जीवनी

Sarabjit Singh Biography in Hindi के विषय में सरबजीत सिंह हमारे भारतीय मूल का ही एक व्यक्ति था जिसे पाकिस्तानी कोर्ट ने आतंकवादी हमलों में दोषी करार दिया था।

आज हम इस देश का वीर सरबजीत सिंह के बारे में पूरी जानकारी जानेंगे हम इनके जीवनी के बारे में जानेंगे। पाकिस्तानी कोर्ट के माध्यम से साल 1990 में लाहौर और फैसलाबाद में हुए बम विस्फोट हमले में वह भी एक सहभागी थे।

और उन्होंने 14 लोगों की हत्या भी कर डाली थी लेकिन हमारे भारत पंजाब के रहने वाले सरबजीत सिंह का यह कहना था कि वह एक साधारण सा किसान थे और बम हमले के 3 महीने बाद भटकते हुए अपने गांव की बॉर्डर से होकर पाकिस्तान की तरफ चले गए थे।

सरबजीत सिंह का जीवन परिचय | Sarabjit Singh Biography

सरबजीत सिंह पंजाब शहर के भीखीविंड के रहने वाले थे यह शहर indo-pak बॉर्डर पर स्थित है उन्हें रेसलिंग का काफी शौक हुआ करता था और वह काफी ज्यादा रेसलिंग किया कर देता है और वह कबूतरों का ध्यान भी काफी ज्यादा रखते थे।

जबकि दूसरी तरफ सरबजीत सिंह एक किसान की तरह काम भी करते थे उनका विवाह सुखप्रीत कौर से हुआ था और हिना की दो बेटियां भी थी जिनका नाम स्वपन दीप और पूनम कार्ड था उनकी बहन का नाम दलवीर कौन था साल 1991 में उन्होंने छुड़ाने की कोशिश भी की थी।

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और उस दौरान एक और महिला थी उसका नाम बलजिंदर कौर बताया गया था और उसने खुद को सरबजीत सिंह की असली बहन भी बताया था जिसकी वजह से सरबजीत सिंह और उनके बहन दलबीर के बीच में नफरत सी आ गई थी बलजिंदर कार के अनुसार सब सरबजीत सिंह के 10 भाई बहन थे जिसमें सब सरबजीत सिंह तीसरे नंबर पर आते थे।

और दलबीर इनकी बहन नहीं थी लेकिन साल 1989 में दलबीर ने सभी को यह भरोसा दिला दिया था कि वही सब सरबजीत सिंह की रिहाई के लिए कोशिश कर रही है और हमने उनकी बात पर बहुत ही आसानी से भरोसा भी कर लिया और उन्हें अपने परिवार में शामिल भी कर लिया था।

और उन लोगों ने यह भी कहा था कि सरबजीत सिंह के असली भाई चरणजीत और हरभजन है और उन्होंने सरबजीत सिंह की चीता को भी उन्हें छूने  तक भीनहीं दिया था और उन्होंने यह भी कहा था कि लोग सरबजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनसे मिलने भी नहीं आए थे।

सरबजीत सिंह पाकिस्तान कैसे पहुंचे थे और पाकिस्तानी कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोप

साल 1990 की बात है जब सीमा पर तार की फेंसिंग नहीं होती थी तब सरबजीत सिंह बहुत ही शराब के नशे में धुत होकर सीमा के उस पर पाकिस्तान पहुंच गए थे उनके पाकिस्तान में जाते ही उन्हें एक पाकिस्तानी कर्नल द्वारा गिरफ्तार भी कर लिया गया था।

और उनकी गिरफ्तारी के साथ दिनों तक उन्हें पाकिस्तानी कोर्ट में भी हाजिर किया गया था लेकिन दिक्कत इस बात की थी कि वह सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी कोर्ट में एक भारतीय जासूस के रूप में शामिल कर रहे थे कोर्ट में सरबजीत सिंह की पहचान मनजीत सिंह के नाम से भी हुई थी।

पाकिस्तानी कोर्ट में सरबजीत सिंह को सभी ने रॉ का एजेंट बताया था और उन्हें लाहौर, मुल्तान तथा फैसलाबाद बम धमाकों में भी शामिल किया था इन्हीं सब आरोपों की वजह से सरबजीत सिंह को परेशानी कोर्ट ने फांसी की सजा भी सुनाई गई थी।

लेकिन इन सबके बावजूद सरबजीत सिंह का परिवार तथा मानव अधिकार संगठन वाले अरिजीत सिंह के साथ में आ गए उन्होंने पाकिस्तान सरकार द्वारा की गई छानबीन का भी पता लगाया।

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तब उन सब को यह पता चला कि पाकिस्तानी कोर्ट में सरबजीत सिंह का जो पासपोर्ट दिया गया था उस पर सरबजीत की फोटो के साथ साथ इसी खुशी मोहम्मद का भी नाम लिखा हुआ था। इसके बाद सरबजीत सिंह के परिवार में बहुत ही तेज खलबली मच गई।

जब पाकिस्तान टीवी चैनलों पर साल 2005 में एक वीडियो में यह साफ दिखाया गया था कि सचिन ने अपना गुनाह खुद कबूल कर लिया है साल 2005 वही साल था जब सरबजीत के पक्ष में एक गवाह सामने आया और उसने कहा कि सरबजीत पर जबरदस्ती करके सारी बातें लागू करवाई गई थी।

यह सारे मामले के बावजूद साल 2008 में सरबजीत सिंह को फांसी लगना तय कर दिया गया था लेकिन फिर भी कुछ प्रयासों के चलते हैं पाकिस्तानी कोर्ट में सरबजीत सिंह पर फांसी वाला फैसला आगे बढ़ा दिया।

और सरबजीत सिंह के बदले सुरजीत सिंह की रिया की गई थी और यह रिया भी सरबजीत के परिवार वाले को एक उम्मीद सा दे गई कि शायद कुछ साल के बाद ही लेकिन सरबजीत सिंह कीवी दिया होगी और वह अपने घर लौट आएगा लेकिन वह नहीं आए और उनकी मौत हो गई।

सरबजीत सिंह के मौत का कारण क्या था?

26 अप्रैल को जेल में ही सरबजीत सिंह पर कैदियों के द्वारा हमला कराया गया था और यह हमला उनके लिए काफी जानलेवा साबित भी हुआ था। जेल में ही 2 कैदियों द्वारा उन पर रात के समय में ईद और चमचों से हमला कराया गया था।

और इसी हमले के कारण वह काफी लहूलुहान भी हो गए थे और कोमा में चले गए थे जिसके वजह जिंदगी से लड़ते-लड़ते उनकी मौत हो गई। 2 मई जीना अस्पताल, लाहौर, पाकिस्तान से रात के 1:00 बजे उनकी प्राण उनके शरीर से अलग हो गई थी।

सरबजीत सिंह के कुछ शिकायतें

सरबजीत सिंह के कुछ शिकायतें भी मौजूद थे जिसमें पाकिस्तानी सरकार द्वारा सरबजीत सिंह के नाम तथा उनके पहचान की गलत पहचान करने के साथ-साथ उनकी कई शिकायतें को भी नजरअंदाज किया गया था।

साल 2010 में सरबजीत सिंह के द्वारा जेल में उनके साथ बहुत ही बुरा व्यवहार किया गया था जिसकी शिकायत सरकार को की गई थी लेकिन पाकिस्तान सरकार ने इस पर बिल्कुल भी ध्यान दिया और जिसके वजह से सड़क जीत सिंह पर बहुत ही बुरी तरह से हमला हुआ।

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और उनके हमले की वजह से आखिरकार सरबजीत सिंह की मौत भी हो गई जिसकी वजह से पूरे जहां में एक शांति थी आ गई और सरबजीत सिंह के परिवार वालों को बहुत ही बड़ा सदमा भी पहुंचा था।

सरबजीत सिंह की मृत्यु के बाद उनका अंतिम संस्कार

जब सरबजीत सिंह की मृत्यु लाहौर पाकिस्तान में हुई तब उनके शव को वही नहीं छोड़ा गया बल्कि भारत में लाया गया और उनकी अंतिम विदाई में भारत के कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी सहित कई ऐसे बड़े बड़े राजनैतिक भी शामिल हुए।

क्योंकि सरबजीत सिंह की दो बेटियां भी थी और उनका अंतिम संस्कार उनकी बहन दलबीर कौर के द्वारा पत्रक गांव में कराया गया था। सरबजीत सिंह की मौत के बाद कुछ ऐसे अखबारों में खुलासा किया गया कि उनके शरीर को बिना दिल किडनी और लीवर के भारत में भेज दिया गया था।

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लेकिन सरबजीत सिंह का पास मोटा पाकिस्तान सरकार द्वारा पहले से ही करके भारत भेजा गया था इसके बावजूद सरबजीत सिंह का परिवार उनके मौत का कारण क्या था इसके बारे में जानना चाहता था।

इसके बाद उनके परिवार की इच्छा से उनका फुट से पोस्टमार्टम किया गया और उस पोस्टमार्टम में अमृतसर मेडिकल कॉलेज के 6 डॉक्टर की टीम ने किया पोस्टमार्टम में उनके शरीर में छाती पर कई सारे चोटों के निशान मिले और उनके मुंह में भी खून के थक्के मिले थे।

सरबजीत सिंह से जुड़ी अनोखी बातें

  • पाकिस्तानी सरकार ने सरबजीत सिंह के केस में कम से कम 38 गवाहों से बयान लिया था और इसके लिए सरबजीत सिंह के परिजनों को भी नोटिस भिजवाया गया था।
  • सरबजीत सिंह के जो वकील तथा उनके बेटे का भारतीय बॉर्डर के पास आवरण करवाया गया था लेकिन कुछ समय बाद उन्हें तुरंत छोड़ भी दिया गया था।
  • मैं आपको बता दूं पंजाब विधानसभा के द्वारा सरबजीत सिंह को राष्ट्रीय सहित घोषित किया गया था और इस तरह से उन्हें राष्ट्रीय सम्मान भी किया गया था।
  • पूरे भारत में सरबजीत सिंह के मृत्यु के दौरान 3 दिनों तक राष्ट्रीय शोक के साथ-साथ उनके परिवार को पूरे 1 करोड़ की सहायता भी की गई थी।
  • जब यह खबर सुनने को आई कि जेल में ही सरबजीत सिंह की हत्या कुछ कैदियों के द्वारा कराई गई तो उसके बाद हिंदुस्तान की सभी जेलों में कैदियों के लिए सुरक्षा बढ़ा दिया गया था।

सरबजीत सिंह के ऊपर बनी फिल्म | Sarabjit Singh Movie

सरबजीत सिंह का जीवन इतना चौंकाने वाला था कि उनके जीवन के ऊपर एक फिल्म भी बन गई जैसे फिल्मों के मशहूर डायरेक्टर Umang Kumar द्वारा कराया गया इस फिल्म में सरबजीत सिंह का किरदार Randeep Hooda कर रहे हैं और इनकी बहन का किरदार Aishwarya Rai Bachchan कर रही हैं।

Conclusion

हमारे देश में ऐसे ऐसे महान वीर देना ने जन्म लिया है जोकि अपने देश के लिए जान तक भी निछावर कर दिया है उन्हीं वीर सेना में एक नाम सरबजीत सिंह का भी आता है आज के इस लेख Sarabjit Singh Biography in Hindi.

मैं हमने सरबजीत सिंह के जीवन के ऊपर बहुत सारी जानकारी प्राप्त की और हमने यह भी जाना कि सरबजीत सिंह की मौत कैसे हुई कहां हुई और किस वजह से हुई। दोस्तों भारत में कई ऐसे वीर सेना है जिनके जीवन के बारे में जानना हमारे लिए बहुत ही जरूरी है ताकि हम उनके जीवन से कुछ नया सीख पाए।

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