आज के इस लेख में हम गणेश चतुर्थी निबंध पर बात करने वाले हैं आप लोगों को पता ही है हर साल गणेश चतुर्थी हमारे भारत देश मैं बड़े धूमधाम से मनाया जाता है और यह पर्व महाराष्ट्र का बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व होता है।

हम लोग इसे काफी धूमधाम से मनाते हैं। इस Festival को पूरे भारत में सारे लोग भक्ति भाव से मनाते हैं। आज मैं आपको इस लेख में गणेश चतुर्थी के पर्व पर काफी अच्छे निबंध बताने वाला हूं जो कि आप इन निबंध को गणेश चतुर्थी की खास मौके पर उपयोग कर सकते हैं। 

गणेश चतुर्थी जैसे जैसे नजदीक आती है वैसे ही हमारे आस पास जितनी भी बाजार होते हैं वह सब पर गणेश जी की मूर्ति उनके पूजा के लिए सामान हर जगह दिखना शुरू हो जाता है यह पर्व हिंदू लोगों के लिए काफी मुख्य पर्व है।

यह Festival हर साल अगस्त या सितंबर के महीने में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है बड़े उत्साह से मनाया जाता है इस दिन हमारे भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था और उनके ही जन्म के दिन पर गणेश चतुर्थी पर्व को मनाया जाता है गणेश भगवान माता पार्वती और भगवान शिव के बेटे हैं।

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गणेश जी को लोग काफी बुद्धि और समृद्धि के भगवान मानते हैं और लोग इनकी पूजा करते हैं ताकि लोगों को भी बुद्धि और समृद्धि हासिल हो सके चलिए हम गणेश चतुर्थी पर निबंध के बारे में विस्तार से जानते हैं।

गणेश चतुर्थी पर निबंध – Ganesh Chaturthi Essay in Hindi (650 Words)

ganesh chaturthi

जैसा कि हम सभी जानते हैं गणेश चतुर्थी हमारे भगवान श्री गणेश जी के जन्मदिन पर मनाया जाता है हमारे हिंदू धर्म में यह बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक त्योहार है। हमारे भगवान श्री गणेश जी को हाथी की सीर वाले भगवान माना जाता है और भगवान दिनेश जी को बुद्धि और समृद्धि वाले देवता के रूप में भी माना जाता है। हमारे भारत देश के हिंदू कैलेंडर के अनुसार गणेश चतुर्थी का आगमन अगस्त या सितंबर के महीने में शुरू हो जाता है। इस त्यौहार को लोग काफी धूमधाम से मनाते हैं जब यह तो हार की शुरुआत होती है तब हम सभी गणेश जी की मूर्तियों को हमारे घरों में हमारे स्कूल में कॉलेज में स्थापित करते हैं।

इसके बाद गणेश चतुर्थी की पूजा की शुरुआत में गणेश जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा से शुरू होती है। इसके बाद गणेश जी की मूर्ति को हम अपने घरों में 10 दिनों तक रखते हैं और हमारे भारत देश में सबसे लंबा त्योहारों में से एक गणेश चतुर्थी त्यौहार है इस त्यौहार को हम 11 दिनों तक मनाते हैं। गणेश चतुर्थी जैसे ही शुरू होता है सारे लोग गणेश जी की मूर्ति बाजार से लेकर आते हैं और उन्हें अपने घर पर स्थापित करते हैं फिर उनकी 10 दिनों तक पूजा करते हैं इसके बाद भी 11वे दिन हम सब उनकी मूर्ति को तालाब या फिर किसी अन्य नदी में विसर्जन कर देते हैं।

गणेश चतुर्थी का त्योहार भारत देश के हर कोने में मनाया जाता है लेकिन महाराष्ट्र के लिए यह त्यौहार काफी महत्वपूर्ण होता है। उन लोगों के लिए यह काफी बड़ा त्यौहार होता है इसलिए इस त्यौहार को वह लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं। गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करने से पहले हम लोग उनकी मूर्ति को बड़े धूमधाम से नाचते गाते लाते हैं ढोल बजाकर पूरे रास्ते हम लोग उनकी मूर्ति को अपने घर लाते हैं। हम सभी लोग आने वाले 10 दिनों तक श्री गणेश जी की आरती करते हैं उनकी पूजा करते हैं उनका आराधना करते हैं उनके लिए तो कई लोग नाच गाना भी करते हैं और गणेश भगवान जी के लिए मंत्र भी पढ़ा जाता है।

हम लोग श्री गणेश जी को उनके मनपसंद मोदक का प्रसाद भी चढ़ाते हैं। इन दिनों हमारे घर, मंदिरों सभी जगह काफी अच्छी सजावट की जाती है ताकि बप्पा हमारे घर आए और हमारे घरों से सारे दुख, मुसीबत लेकर जाए और खुशियां देकर जाए। हम अक्सर कोई भी काम करने से पहले हमारे भगवान श्री गणेश जी को याद करते हैं गणेश भगवान बच्चों के लिए काफी मनपसंद भगवान है बच्चे उन्हें कभी प्यार करते हैं और कई बच्चे गणेश भगवान को तो गणेशा के नाम से भी बुलाते हैं। गणेश चतुर्थी को हम भगवान शिव के पुत्र बाल गोपाल गणेश जी के जन्मदिन के ऊपर मनाते हैं।

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गणेश चतुर्थी मनाने के पीछे बहुत बड़ा कारण है एक बार हमारे भगवान देवों के देव महादेव किसी बात को लेकर गणेश जी से काफी गुस्सा हो गए थे तब उन्होंने गुस्से में अपने पुत्र गणेश का सर धड़ से अलग कर दिया था। इसके बाद माता पार्वती ने भगवान शिव को बोला कि कैसे भी करके आप मेरे बच्चों को वापस ले आओ इसी के बाद भगवान शिव ने एक हाथी के बच्चे का सर गणेश जी के धड़ से जोड़ दिया और इसी तरह गणेश जी का दोबारा से जन्म हुआ और इस खुशी में इस दिन को ही गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाने लगा। 

जब भगवान गणेश जी हमारे घर, मंदिरों में आते हैं तब 10 दिनों तक उनकी पूजा होती है धूमधाम से आरती होती है घर में मंदिर में बहुत ही भक्ति भावना माहौल रहता है। इसके बाद 11वे दिन जब गणेश जी का विसर्जन होता है तब हम सभी हमारे भगवान गणेश जी को अलविदा कहते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं कि हम अपने जीवन में काफी तरक्की करें काफी आगे जाए और हम उनसे अगले साल जल्द से जल्द आने की कामना करते हैं।

गणेश चतुर्थी पर निबंध (450) शब्दों में

गणेश चतुर्थी भारत देश के सारे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक त्यौहार है। आज के दिन ही श्री गणेश जी का जन्म हुआ था और उनके जन्मदिन के अवसर पर इस त्यौहार को मनाया जाता है इस त्यौहार को मुख्य रूप से हम हिंदू ही मनाते हैं और कई सालों से इस त्यौहार को हम हिंदू बहुत ही धूमधाम से मनाते आ रहे हैं वैसे तो यह त्यौहार और कोई मनाता है लेकिन महाराष्ट्र में इस त्यौहार का महत्त्व काफी अधिक है उन लोगों के लिए यह त्यौहार सबसे बड़ा त्यौहार होता है और इसी वजह से इस त्यौहार को काफी अच्छे से मनाया जाता है।

गणेश चतुर्थी एक ऐसा त्यौहार है इसमें हम उनकी तैयारी तो पहले से ही शुरु कर देते हैं जब गणेश चतुर्थी आता है तब हम अपने घरों मैं एवं मंदिरों में गणेश जी की मूर्ति पूरे रास्ते नाचते गाते लाते हैं और उनकी स्थापना करते हैं उनके स्थापना करने के बाद पूरे 10 दिन तक गणेश जी आरती होती है पूजा होती है मंत्र जाप किया जाता है उनके मनपसंद मोदक के प्रसाद भी चढ़ाए जाते हैं। इस त्यौहार के दौरान हमारे आसपास काफी अच्छा भक्ति माहौल होता है गणेश चतुर्थी में हम अपने घरों में अलग-अलग तरह के पकवान बनाते हैं और मंदिरों में गरीबों के लिए खाने का बंदोबस्त भी किया जाता है।

हमारे हिंदू धर्म में इस त्यौहार को भाद्र के महीनों में मनाया जाता है यानी के गणेश चतुर्थी का त्योहार 22 August से लेकर 20 September के बीच मनाया जाता है।

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जैसे ही गणेश उत्सव के 10 दिन पूरे हो जाते हैं वैसे ही 11वे दिन हमारे गणेश विसर्जन के लिए तैयारी भी शुरू कर दी जाती है इस पर्व की खास बात यही है कि इस पर्व को लाया भी बहुत धूमधाम जाता है और गणेश जी को अलविदा भी बहुत ही धूमधाम से किया जाता है। हमारे भगवान श्री गणेश जी के विसर्जन के लिए बहुत ही खूबसूरत सा रथ बनाया जाता है और गणेश जी को उस रथ पर बैठाया जाता प्रीति के साथ साथ गणेश भगवान की आरती की जाती है उन्हें रंग बिरंगे फूलों से सजाया भी जाता है।

इस के बाद पूरे शहर में भगवान गणेश जी की शोभा यात्रा कराई जाती है इस यात्रा के दौरान सारे लोग एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं पटाखे चलाते हैं नाच गाना करते हैं धूमधाम से मस्ती करते हैं और पूरे शहर में हर जगह एक ही नारा लगाया जाता है “गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया” और ऐसे करते करते भगवान गणेश जी की मूर्ति को शहर के किसी तालाब एवं नदी में विसर्जन कर दिया जाता है और उनसे आशीर्वाद लिया जाता है और यह कहा जाता है की बप्पा अगले साल भी इसी तरह धूमधाम से आना।

गणेश जी का जन्म कैसे हुआ?

हमें यह तो पता है कि गणेश जी का जन्म के दिन ही गणेश चतुर्थी को मनाया जाता है लेकिन ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनको यह नहीं पता कि गणेश जी का जन्म कैसे हुआ उनके जन्म के बारे में आज हम जानेंगे गणेश जी का जन्म के पीछे कुछ Shocking Facts शामिल है।

मैं आपको बता दूं हमारे शिव पुराण ग्रंथों के अनुसार एक दिन माता पार्वती किसी नदी के तट पर स्नान करते समय खुद के शरीर के मेल से एक बच्चे की आकृति की मूर्ति बनाई और फिर कुछ समय के बाद उस मूर्ति में अपने शक्तियों के द्वारा प्राण फूंक दिया उसके बाद उस मूर्ति ने भगवान गणेश का रूप ले लिया।

इसके बाद भगवान गणेश जी का जन्म हो गया था लेकिन सारे देवताओं ने भगवान गणेश को तब जाना जब एक दिन मां पार्वती ने अपने बेटे गणेश जि से यह कहा कि वह नदी में स्नान करने जा रही हैं इसलिए महल के द्वार पर जाकर खड़े हो जाओ और महल में किसी को भी अंदर आने मत देना यह आदेश सुनकर भगवान गणेश जी महल के द्वार पर खड़े हो गए।

इसी के बाद अचानक भगवान शिव जोकि कई वर्षों से तपस्या कर किस लौटे थे और वह अंदर महल में प्रवेश कर रहे थे लेकिन गणेश अपनी माता का आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को अंदर आने के लिए रोक रहे थे तब उसी समय भगवान शिव ने बालक गणेश को काफी समझाया लेकिन फिर भी गणेश जी भगवान शिव को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया।

भगवान शिव को इस बात पर काफी ज्यादा गुस्सा आ गया और उसी समय भगवान शिव ने गणेश जी का सर धड़ से अलग कर दिया जब भगवान शिव ने दिनेश जी का सर धड़ से अलग किया तब उनको यह बिल्कुल अंदाजा नहीं था बालक गणेश उनके सुपुत्र है। इसी के बाद मां पार्वती जब अपने पुत्र को मृत देखा तब मां पार्वती बहुत ही ज्यादा रोए और क्रोधित भी हुई और जब मां पार्वती ने भगवान शिव को यह बताया कि बाल गणेश हमारा पुत्र है तब महाशिव को एहसास हुआ कि मुझसे गलती हो गई और उसी क्षण भगवान शिव ने नंदी को आदेश दिया कि सूर्योदय से पहले अपनी मां के साथ सोए हुए किसी भी जानवर के बच्चे का सर काट कर ले आओ।

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इसके बाद नंदी ने पूरी कोशिश की हर जगह ढूंढा लेकिन नंदी को ऐसा कोई जानवर नहीं मिला जो अपनी मां के साथ सोया हुआ हो लेकिन अंत में नंदी को हाथी के बच्चे का सर काट कर ले गया और भगवान शिव को दे दिया भगवान शिव ने तब अपनी शक्तियों की मदद से भगवान गणेश जी को दोबारा से जन्म किया और इसी के बाद भगवान गणेश का जन्म हुआ और गणेश जी को सारे देवताओं के द्वारा शक्तियां भी मिले।

भगवान गणेश जी के 12 नाम अर्थ के साथ

नारद पुराण के अनुसार भगवान श्री गणेश जी के अलग-अलग 12 चमत्कारी नाम अर्थ के साथ कुछ इस प्रकार है –

  • सुमुख : इस नाम का अर्थ एक सुंदर सा मुख है
  • एकदंत : इस नाम का अर्थ एक दांत वाला है
  • कपिल : इस नाम का अर्थ है कपिल वर्ण वाले
  • गजकर्ण : इस नाम का अर्थ है हाथी के कान वाले
  • लंबोदर : इस नाम का अर्थ है लंबे पेट वाले
  • विकट : इस नाम का अर्थ है मुश्किलों के नाश करने वाले
  • विनायक : नाम का अर्थ है न्याय करने वाले
  • धूम्रकेतु : इस नाम का अर्थ है धुएं के रंग वाले पताका वाला
  • भालचंद्र : इस नाम का अर्थ है सर पर चंद्रमा को धारण करने वाले
  • गजानन : किस नाम का अर्थ है हाथी के मुख वाले
  • गणाध्यक्ष : इस नाम का अर्थ है गुणों और देवताओं के अध्यक्ष वाले
  • विघ्नविनाशक : इस नाम का अर्थ है विद्य को खत्म करने वाले

FAQ on Ganesh Chaturthi 

Q1. गणेश चतुर्थी कब मनाया जाता है?

गणेश चतुर्थी भाद्र के महीने में मनाया जाता है।

Q2. गणेश जी कितने दिन बैठते हैं?

भगवान गणेश जी कुल 9 दिन बैठते हैं 10वे दिन उनका विसर्जन कर दिया जाता है।

Q3. 2021 में गणपति कब है?

2021 में गणपति 10 सितंबर को है।

Q4. भगवान गणेश जी की घर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? 

घर में गणेश जी की कम से कम 2 मूर्तियां होनी चाहिए उससे कम आप बिल्कुल ना रखें।