15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हुआ था और हमारे देश को आजाद हुए आज 74 साल हो चुके हैं और इस 74 साल मैं हमारा देश हमारा भारत बहुत आगे जा चुका है बहुत तरक्की कर चुका है लेकिन क्या आपको पता है हमारे देश bharat ko swatantrata kaise mili?

हमारे देश में आज़ादी मिलने से पहले क्या माहौल था क्या स्थिति थी हमारे देश को आजाद करने में किन-किन लोगों ने अपना सब कुछ लगा दिया बहुत ही सेना ने अपनी जान गवा दी महात्मा गांधी ने अंग्रेजो से लड़के हमारे देश को आजाद कराया आज हम पुरा इसी विषय में बात करने वाले हैं कि स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है?

इसका महत्व क्या है आज हम यह सब जानेंगे और दोस्तों आज के दिन यानी कि 15 अगस्त के दिन पूरे भारत में एक उत्साह का माहौल होता है स्कूल्स में कॉलेज में ऑफिस में हर जगह हमारे देश का तिरंगा लहराता है |

उस दिन हम लोग राष्ट्रगीत गाते हैं एक दूसरे से गले मिलते हैं और सब से प्यार करते हैं तो 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद कैसे हुआ इसका वर्णन मैं यहां करने वाला हूं आइए दोस्तों हम सब मिलकर जानते हैं कि हमारा देश हमारा भारत को स्वतंत्रता कैसे मिली|

स्वतंत्रता का इतिहास (History of Independence in Hindi)

mahatma-gandhi

जब 1757 में ब्रिटिश भारत आई तब उन्होंने ईस्ट इंडिया नामक कंपनी (व्यापार के सिलसिले) से भारत में आगमन हुआ ईस्ट इंडिया कंपनी लगभग 100 साल तक भारत मैं शासन करती है पहले वर्ल्ड वार के दौरान भारत में स्वतंत्रता संग्राम शुरू हुआ और उसका नेतृत्व महात्मा गांधी के द्वारा किया गया तो ब्रिटिश राज को अहिंसा और शांति से भगाना चाहते थे|

स्वतंत्रता पाने के लिए हमने बहुत ही बलिदान और आंदोलनों का सामना किया है| लगभग 1757 के आसपास यूरोपियों ने भारत पर अपना कब्जा जमाना शुरू किया ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा भारत में सारी सुविधाओं को पाने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए बहुत आसान हो गया भारत पर कब्जा जमाना|

1757 के आसपास भारत पर मुगल शासन था मुगल के पतन के बाद British ने Support बनाना शुरू किया दूसरे Empire को सलाह मशवरा दे कर चुकी अंग्रेज विशाल तोपों और न युद्ध तकनीक से लास्ट है इसलिए उनका समर्थन कई भारतीय शासकों के लिए मददगार साबित हुआ उनके समर्थन के बदले ईस्ट इंडिया कंपनी मद्रास कोलकाता और मुंबई जैसे स्थानों में व्यापारिक केंद्र स्थापित करने में सफल रही|

अंग्रेजों ने धीरे-धीरे अपनी किलेबंदी का विस्तार करना शुरू किया जब उन्हें बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला द्वारा अपना विस्तार रोकने के लिए कहा गया तो उन्होंने उसे प्लासी की लड़ाई 1757 में हरा दिया सिराजुद्दौला के खिलाफ इस जीत ने पूरे भारत को उपनिवेश बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई|

ब्रिटिश शासन के खिलाफ शुरुआती विद्रोह अपने थोड़े मोरे लाभ के लिए बहुत सारे भारतीय शासकों ने भारत में ब्रिटिश कॉलोनाइजेशन का समर्थन किया लेकिन उनमें से बहुत लोगों ने ब्रिटिश ओं का विरोध किया था इसने भारतीय शासकों के बीच संघर्ष पैदा हुआ मनमुटाव पैदा हुआ जिसका इस्तेमाल अंग्रेजों ने अपने फायदे के लिए बहुत अच्छे से किया और उन्होंने उस वक्त से ही यह रणनीति शुरू कर दी थी फूट डालो और शासन करो|

ब्रिटिश सरकार ने बहुत अच्छे से भाग लिया था कि भारत में सामाजिक सांस्कृतिक उच्च नीच जात पात सब को लेकर बहुत भेदभाव है और उसका बहुत ही अच्छा इस्तेमाल करते हुए उन्होंने उपनिवेशवाद से संरचना किया|

भले ही भारत में अनेकों Difference होने के बावजूद भारतीयों ने अंग्रेजी सत्ता का विरोध किया क्योंकि अंग्रेजों ने ना ही सिर्फ सांस्कृतिक सामाजिक रुप से हमारा शोषण किया था बल्कि भारतीय लोगों का आर्थिक रूप से भी बहुत बुरा शोषण किया था आर्थिक रूप से शोषण होने के बावजूद ही आज भारत को एक पिछड़ा देश पूरी दुनिया की नजर में माना जाता है|

प्रमुख 6 आंदोलन जिससे भारत को स्वतंत्रता मिली

independence day of India

भारत में अनेकों आंदोलनों के बाद स्वतंत्रता मिली जिनमें से प्रमुख पांच को यहां पर मैंने बताया है सारे आंदोलनों की शुरुआत और अंत कहीं ना कहीं एक दूसरे आंदोलन से जुड़ी हुई है|

जैसे भारत छोड़ो आंदोलन, नॉन कोऑपरेटिव मूवमेंट, बंगाल का विभाजन, खिलाफत आंदोलन जैसी! आइए हम जानते हैं कि इन आंदोलनों ने हमें कैसे मदद की British प्शासन के अधीन से निकलने मैं –

(1) 1857 का आंदोलन

1857 का विद्रोह भारत पर बहुत ही महत्वपूर्ण परंतु एक असफल विद्रोह था जिसने ब्रिटिश क्राउन की ओर से संप्रभु शक्ति के रूप में कार्य किया Sepoy Mutiny से मंगल पांडे ने आंदोलन की शुरुआत की मंगल पांडे जैसे सैनिक के वजह से हमारा देश आज आजाद है उन्होंने उस ब्रिटिश के बनाए हुए कारतूस को इस्तेमाल करने के लिए मना कर दिया जो कारतूस गाय और सूअर के मांस से बना था इस बात से मंगल पांडे काफी गुस्सा थे और उन्होंने इस कारतूस को इस्तेमाल नहीं किया इस वजह से ब्रिटिश वालों ने मंगल पांडे को फांसी की सजा सुना दी और मंगल पांडे अपने देश के लिए लड़ते-लड़ते इस दुनिया से आजाद हो गए|

(2) बंगाल का विभाजन

भारत के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने यह अनाउंस किया कि आप बंगाल का विभाजन करते है वायसराय ने दो भाग में बंगाल को बांटने की रणनीति बनाई पहला हिस्सा जो मुस्लिम मेजॉरिटी था जो कि पूर्व में था और हिंदू मेजॉरिटी जो पश्चिम में थे |

जुलाई 1905 को उन्होंने अनाउंस किया था और इस पार्टीशन को होते-होते अक्टूबर 1905 हो चुके थे भारत की जनता ने बहुत कुरूरर और दयनीय हालत में ब्रिटिश गवर्नमेंट का उनके फूट डालो शासन करो की रणनीति को भापा और उसका जमकर विरोध किया फिर बंगाल 1911 में वापस से जुड़ा बहुत से संघर्ष के बाद और सिर्फ अब जाकर 1947 में इसका विभाजन एस पाकिस्तान और भारत के रूप में हुआ|

(3) महात्मा गांधी का आगमन

साउथ अफ्रीका में कॉलोनियल Empire के विरुद्ध लड़ने के बाद महात्मा गांधी भारत लौटे 1915 में वापस आते हैं उन्होंने किसानों और Labor के विरोध किए गए कॉलोनियल कानूनों के खिलाफ उन्होंने आवाज उठाई गांधी कांग्रेस पार्टी 1921 में Join करते हैं और पूरे भारत में ब्रिटिश एंपायर के खिलाफ आंदोलन शुरू करते हैं|

उनका रोल इंडियन फ्रीडम Struggle में बहुत ऊंचा माना जाता है उनका पॉलिटिकल Acumen भारत को वास्तविक रूप से आजाद करने के लिए महत्वपूर्ण है उन्होंने हमेशा अहिंसा, औरतों के अधिकार, छुआछूत के विरोध, अनेक जाति धर्म के बीच होने वाले भेदभाव से अलग होकर सोचा और लोगों को बताया|

(4) खिलाफत आंदोलन

खिलाफत आंदोलन 1919 से लेकर 1924 तक चला प्रथम विश्वयुद्ध के बाद वर्षों में भारतीय मुसलमानों द्वारा भारतीय राष्ट्रवाद से संबंधित एक आंदोलन था इसका उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ ब्रिटिश सरकार पर इस्लाम के खिलाफ के रूप में तुर्क सुल्तान के अधिकार को बनाए रखने के लिए दबाव बनाना था|

इसके प्रमुख वॉलिंटियर्स शौकत अली मौलाना मोहम्मद अली जौहर हकीम अजमल खान अब्दुल कलाम आजाद रहे यह एक Pan Isalamic Movement भी भारत में कहा जाता है जिसे Caliphat Movement भी कहा जाता है|

(5) सविनय अवज्ञा आन्दोलन

महात्मा गांधी जी ने एक और आंदोलन की शुरुआत की थी जिसका नाम सविनय अवज्ञा आंदोलन था इस कार्यक्रम में बहुत सारे जो ब्रिटिश गवर्नमेंट नियम कानून भारतीयों के लिए बनाया था उसे तोड़ने का Plan था बहुत सारे कानून थे जैसे कि नमक कानून सरकारी संस्था पर शिक्षक केंद्रों का बहिष्कार करना मदिरापान अफीम के दुकानों पर औरतों का धरना देना विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना British गवर्मेंट ने भारतीयों पर अनेकों प्रकार के कानून लगाए थे|

जिसमें से उनका एक यह कानून था कि नाही भारतीय अपने देश अपने जगह पर नमक बना सकते थे और ना ही उसको भेज सकते थे अंततः हमें विदेशों के द्वारा बनाए गए नमक जो कि उस टाइम में Infact अभी भी बहुत Basic Use माना जाता है 21 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने अपने करीबन 80 वॉलिंटियर्स को लेकर साबरमती तक 200 मील का रास्ता पैदल तय किया था और हमारे खुद भारतीय नमक बनाकर विदेशी कानून को तोड़ा था इसके लिए महात्मा गांधी को जेल भी जाना पड़ा था|

(6) भारत छोड़ो आंदोलन

भारत छोड़ो आंदोलन भारत के स्वतंत्रता के इतिहास में कहीं ना कहीं बहुत ज्यादा ही महत्वपूर्ण आंदोलन था इसको महात्मा गांधी ने हरिजन पत्रिका में एक लेख के रूप में लिख कर शुरू किया था! सन 1942 अगस्त में इस आंदोलन की शुरुआत हुई थी महात्मा गांधी ने इस आंदोलन में करो या मरो का नारा दिया था|

हालांकि इस आंदोलन को महात्मा गांधी ने अहिंसा के मार्ग पर चलकर शुरू किया था पर भारत के बहुत से हिस्से में बहुत से सेनानियों का सब्र खत्म हो रहा था क्योंकि ब्रिटिश हिंसात्मक रूप से उन पर अत्याचार कर रहे थे और कुछ जगह पर हिंसा के रूप में भी आंदोलन हुआ|

भारतीय स्वतंत्रता दिवस का महत्व (Importance of Independence Day in Hindi)

15 अगस्त 1947 इस दिन का महत्व भारत के हर एक वासियों के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि इसी दिन हमारा देश ब्रिटिश शासन से आजाद हुआ था जो ब्रिटिश शासन हम भारतीयों पर अत्याचार करते थे हमसे हमारा ही देश सुनना चाहते थे दोस्तों भारत को आजादी दिलाने के लिए हमारे बहुत सारे क्रांतिहीरो ने अपने तरह से हमारे देश को आजाद करने के लिए योगदान दिया इतने सारे आंदोलन होने के बाद आखिरकार ब्रिटिश सरकार हमारे सामने झुक गए हार गए और साथ ही साथ हमारा देश आजाद हो गया|

15 अगस्त 1947 के तारीख को हमारे देश में पहली बार दिल्ली के लाल किले में हमारे प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने अपने हाथों से पहली बार हमारे देश का झंडा फराया और देशवासियों को संबोधित किया इस दिन हमारे पूरे देशवासियों को ऐसा महसूस हुआ कि मानो हमारा देश फिर से सही मार्ग पर आ गया हर 15 अगस्त को देश में सारे लोग राष्ट्रीय गीत गाते हैं

तिरंगा फहराते और सभी लोगों के आंखों में नमी होती है उन लोगों के लिए जो अपने देश के लिए अपनी देश की आजादी के लिए इस दुनिया से लड़ते लड़ते अपना दम तोड़ दिए और इसी कारण से इस दिन का हर भारतीय वासियों के लिए बहुत महत्व रखता है|

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के विख्यात स्वतंत्रता सेनानी (Freedom Fighters of India in Hindi)

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में देश के हर तबके से तबके के लोगों ने भाग लिया छोटी आदिवासी ऊंची अमीरी गरीबी हिंदू-मुस्लिम सारे तबके के लोगों ने इसमें भाग लिया था इन लोगों के नेतृत्व करने की जिम्मेदारी जिन लोगों ने उठाई थी उसके प्रमुख नेताओं स्वतंत्रता संग्राम में से:-

  • महात्मा गांधी
  • गोपाल कृष्ण
  • गोखले बाल
  • गंगाधर तिलक
  • लाला लाजपत राय
  • श्री अरबिंदो घोष
  • नेताजी सुभाष चंद्र बोस
  • भगत सिंह
  • चंद्रशेखर आजाद
  • सूर्यसेन
  • बटुकेश्वर दत्त आदि

अनेकों अनगिनत सेनानियों ने हिस्सा लिया था कि मैं भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद और बटुकेश्वर दत्त आदि महात्मा गांधी के अहिंसात्मक मार्ग पर चलने के लिए तैयार नहीं थे|

भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त और आधी इन्हें गर्म तल का मेंबर कहा जाता था और यह महात्मा गांधी के विपरित अहिंसात्मक रूप से स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिए थे इसी तरह सुभाष चंद्र बोस ने भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना अलग रास्ता तैयार किया था और उसका नाम उन्होंने हिंद फौज के नाम पर रखा था|

आजाद हिंद फौज चौकी नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा स्थापित किया था वह संगठन ब्रिटिश शासन से भारत को छुटकारा दिलाया था इस सेना का जापान के साथ गठबंधन था क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध के समय जापान ब्रिटेन सरकार के खिलाफ लड़ रही थी|

आजाद हिंद फौज ने ब्रिटिश सेनाओं से बर्मा इंफाल कोहिमा आदि स्थानों पर जापानी सेना के साथ मिलकर युद्ध किया था| भारत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बहुत सारी महिलाएं फाइटर्स की थी कि लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था वैसे तो रानी लक्ष्मीबाई के वक्त से यह सिलसिला शुरू हो गया था जिसमें से बहुत गिनी चुनी नाम है जैसे मातंगिनी हजारा भी जा, सुचिता कृपलानी, श्रीमती सरोजिनी नायडू, सिस्टर निवेदिता, श्रीमति एनी बेसंट, रानी लक्ष्मीबाई, ताराबाई आदि बहुत सारी सेनानी जूरी हुई थी|

Conclusion:

मेरे इस Article से है आपको यह अच्छे से समझ आ जाएगा कि हमारे भारत में ब्रिटिश सरकार का कितना कुरुर शासन था भारत के लोगों ने उस वक्त कितना कुछ झेला कितना कुछ सहा और कितने सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर हमारे लिए आजादी ब्रिटिश गवर्नमेंट से हमें आजाद किया|

हमें आज की आजादी इतनी प्यारी लगती है आप यह पढ़कर समझ सकते हैं कि हमारे 100 साल पहले हमारे भारत के लोगों ने आजादी के लिए कितना कुछ साहा होगा और कितना कुछ देखा होगा उन्होंने सब कुछ दाव पर लगाकर भारत को ब्रिटिश राज्य से आजाद कराया था |

इसी वजह से उन सारे सेनानियों के बलिदान के वजह से आज हम भारत में सुख समृद्धि और आजादी के रूप में रह रहे हैं भारत एक बहुत महान देश है और इसे महान हमारे Free Fighters ने बनाया है|