नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं भाई दूज के बारे में भाई दूज का त्यौहार कब आता है भाई दूज को हम क्यों मनाते हैं (Bhai Dooj History in Hindi) और इसके मनाने के पीछे कारण क्या है आज इन सब विषय पर चर्चा करेंगे और मैं आपको बताऊंगा भाई दूज त्यौहार का इतिहास और महत्व जो कि हर एक इंसान को जानना बहुत जरूरी है।

भाई दूज सारे मुख्य त्योहारों में से एक त्यौहार है भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय को हम भारतवासी मनाते हैं और भाई दूज हिंदुओं का महत्वपूर्ण पर्व है इसे बहुत ही प्यार से मनाया जाता है।

भाई दूज को हम भ्रातृ द्वितीया या यम द्वितीया के नाम से भी हम जानते हैं यह भाई दूज का त्योहार दिवाली से बाद आता है इस त्यौहार को भाई बहन बहुत ही प्यार से मनाते हैं और यह त्यौहार दीवाली का आखरी त्यौहार है।

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भाई दूज का त्यौहार इतना पावन त्यौहार है इस त्यौहार के दिन सारी बहनें अपने भाइयों के लिए दुआ करती हैं ईश्वर से कामना करती है कि उनका भाई हमेशा आगे बढ़े अपने जीवन में सुख समृद्धि पाए और इसके बदले में भाई सब अपनी बहनों को कुछ उपहार देते हैं।

भाई दूज इस साल 2021 में 6 नवंबर शनिवार को मनाया जाएगा जोकि दिवाली के 2 दिन बाद आएगी। इस त्यौहार में ऐसे बहुत सारे बहन है जो अपने भाई से नहीं मिल पाती है लेकिन अपने भाइयों को बहुत ही प्यारा शुभकामनाएं या फिर संदेश भेजना चाहते हैं तो उसके लिए मैंने बहुत सारे Bhai Dooj Wishes पर लेख लिखा है आप एक बार जरूर चेक करें।

भाई दूज क्यों मनाया जाता है? | Why We Celebrate Bhai Dooj

Bhai Dooj History in Hindi

भाई दूज भाई बहनों का प्यार का रिश्ते का पर्व है इस पर्व को मैंने अपने भाइयों के लिए करती है यह पर्व हमारे हिंदू धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। भाई दूज का यह त्यौहार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय को मनाया जाता है भाई दूज के त्योहार को हम यम द्वितीया के नाम से भी जानते हैं इसके पीछे कहानी है जो मैं आपको आगे बताऊंगा।

भाई दूज के इस त्यौहार में सारी बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती है और खूब सारी मिठाइयां खिलाती है और उनके अच्छे भविष्य के लिए दुआ करती है बदले में हम भाई साहब अपनी बहनों को शगुन के तौर पर उसे उपहार देते हैं।

भाई दूज पर्व को लेकर ऐसे कई सारी कथाएं हैं जो की बहुत ही ऐतिहासिक कथाएं हैं लेकिन मैं आपको आज भाई दूज के पर्व को लेकर एक ऐसी कहानी बताऊंगा जो हर एक इंसान के जवाब पर रहती है।

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मृत्युलोक के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना इन दोनों में काफी ज्यादा प्रेम था यमुना अपने भाई को हमेशा घर आने की जिद करती थी लेकिन स्वामी जी यमराज अपने कार्य में इतने व्यस्त रहते थे कि वह अपनी बहन से नहीं मिल पाते थे।

लेकिन एक दिन कार्तिक शुल्क के समय था और उस दिन यमुना जी ने अपने भाई यमराज को एक बार फिर से घर आने की जीत की और वचनबद्ध लेकर बैठ गई इससे यमराज अपनी बहन की जीत के सामने नहीं जीत पाए और घर आने के लिए मान गए।

दोस्तों क्या आप जानते हैं जब स्वामी यमराज अपनी बहन यमुना की बात मानकर अपने घर जा रहे थे तब घर जाने से पहले यमराज ने नर्क में आने वाली जितनी भी जीव है उन सभी को यमराज से मुक्त कर दिया था और इसी के बाद यमराज अपनी बहन यमुना जी के घर पहुंचे।

तो यमराज के घर जाने की खुशी में यमुना अपने भाई को चंदन का टीका लगाकर उनकी आरती उतारी और इसी के साथ साथ ऐसे कई सारे प्रकार के भोजन बनाकर अपने भाई यमराज को खिलाई और उनका खूब सत्कार भी किया यह सब देखकर यमराज बहुत ही खुश हुए और अपनी बहन से कोई भी वरदान मांगने के लिए कहे।

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जैसे यमराज ने अपनी बहन यमुना से वरदान मांगने के लिए बोला तो यमुना जी ने सिर्फ उनसे इतना बोला कि भद्र आप इसी तरह हर साल इस दिन हमारे घर आया कीजिए और इस दिन जो भी बहन अपने भाई का आदर करें सम्मान करें उसे टीका लगाए उस भाई को कभी भी आपका भय ना हो।

यमराज अपनी बहन की यह बात सुनकर उसे यह वरदान दिया तभी से हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को भाई दूज का यह पावन त्यौहार को मनाया जाने लग गया और हम सब भारतवासी इस्तेमाल को बहुत ही प्यार से और सम्मान से मनाते हैं।

भाई दूज मनाने का रिवाज एवं परंपरा

हमारा भारत त्योहारों का देश है हमारे भारत में ऐसे कई सारे त्यौहार मनाए जाते हैं जो की बहुत ही पवित्र और बहुत ही आनंददायक होता है और हम सब सारे त्योहारों को बहुत ही उत्साह से मनाते हैं उन सारे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक त्यौहार भाई दूज का फी है।

इस त्यौहार को मनाने का परंपरा और विवाद काफी साधारण है और काफी प्यारा है इस त्यौहार के दिन सारी बहनें अपने भाई के लंबी उम्र और उसके अच्छे जीवन के लिए मनोकामना करती है और सुबह सुबह स्नान करके हमारे भगवान विष्णु और भगवान गणेश जी का पूजा करती है और व्रत रखती है।

इसी के बाद सारी बहनें अपने भाइयों के माथे पर रोली चंदन का टीका लगाती है और उनकी आर्थिक तृतीय और मिठाइयां भी खिलाती है इसके बदले में हम भाई साहब अपनी बहनों को बहुत प्यारे प्यारे उपहार भी देते हैं।

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बहुत सारे ऐसे भाई है जो कि भाई दूज के दिन अपनी बहनों को घर जाकर भोजन भी करते हैं और उन्हें ढेर सारी उपहार भी देते हैं और बहुत सारे लोगों का मानना है और ग्रंथों में भी यह कहा गया है कि अगर फिर उसके दिन आप यमुना नदी के पास जाकर स्नान करते हैं और उनके तट पर पूजा करते हैं तो आपको काफी अच्छा फल प्राप्त हो सकता है।

भाई दूज त्यौहार का इतिहास | History of Bhai Dooj

ऐसा माना गया है कि भाई दूज का त्यौहार यमराज के समय से मनाया जा रहा है और इसका इतिहास काफी पुराना है और कई लोगों का मानना है कि यह त्यौहार आमतौर पर भाई बहन के प्यार के रिश्ते को समर्पित करता है और कहीं ना कहीं इसका इतिहास रक्षाबंधन त्यौहार से भी पुराना है।

हमारे भारत में रक्षाबंधन त्यौहार को मनाया जाता है भाई बहन के प्यार को दिखाया जाता है उसी तरह भाई दूज त्यौहार को भी हम काफी समय से मनाते हैं और इस त्यौहार का इतिहास बहुत ही पुराना है और इस पर्व को लेकर काफी ऐसे कथाएं भी प्रचलित हुई है।

यम और यमुना की कहानी

भाई दूज त्यौहार के प्रति ऐसी कई सारी कथाएं प्रचलित हैं लेकिन मैं आपको सबसे अधिक प्रचलित वाला कथाएं जो कि यम और यमुना की कहानी है उनके बारे में बताऊंगा।

सूर्य की पत्नी जो की संज्ञा दी थी उनके दो संतान हुई थी जिनमें से एक प्रथा और एक पुत्री था सर का नाम यमराज था और पुत्री का नाम यमुना रखा गया था इसके बाद जब यमराज ने अपनी ही नगरी यमपुरी को बनाया तो उसके बाद यमराज की बहन यमुना भी उनके साथ रहने लग गई थी।

जब भी यमराज पापियों को सजा देते थे उन्हें बहुत दुख देते थे तब यह सब जमुना जी देख नहीं पाते थी और यही वजह है कि यमुना जी ने यमपुरी को जाकर गोलोक के लिए चल पड़ी।

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इसी के बाद दोस्तों समय बीतता गया और यमुना जी अपने भाई यमराज से कई साल तक नहीं मिली इच्छा बहुत ही मिलने की जाति भी थे और कई बार यमुना जी ने अपने भाई हेमराज को अपने घर बुलाया भी था मिलने के लिए लेकिन यमराज के पास इतने सारे कार्य होते थे कि उनके पास समय नहीं होता था।

इसी के साथ ऐसे कई साल और गुजर गए लेकिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर नहीं जा पाए लेकिन अचानक कार्तिक मास के दिन यमराज को अपनी बहन की बहुत याद आ रही थी तब उन्होंने अपने दोस्तों से कहा कि जाकर यमुना के बारे में पता लगाओ वह कहां है।

दोस्तों के द्वारा यमुना का पता नहीं लग पाया इस वजह से युवराज खुद गोलोक चल गए अपने बहन के बारे में पता लगा ले तभी वह अपने बहन से मिलते हैं और यमुना जी युवराज को अपने घर आने की विनती करती है।

जब यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए तभी जमुना जी ने अपने भाई का बहुत ही अच्छी तरह से स्वागत किया उन्हें बहुत अच्छे से पकवान खेला है उन्हें तिलक लगाए उनकी काफी अच्छी सेवा की इस वजह से यमराज बहुत प्रसन्न हुए और अपनी बहन को बोले कि तुम कोई वरदान मांगो।

यमुना जी ने कहा भैया मैं बस यही चाहती हूं कि हर साथ आप मेरे घर पर आए और आज के दिन कार्तिक मास के शुल्क पक्ष की तृतीया के दिन जो भी भाई अपने बहन से तिलक लगाता है मेरी घर जाकर उनका सम्मान करता है उन्हें कभी भी यमराज के कोप का सामना ना करना पड़े।

इसी के साथ जो भी इंसान आज के दिन यमुना नदी में स्नान करके उसके तट पर पूजा करता है तो वह यमपुरी का सामना ना करें इसी के बाद यमराज ने अपनी बहन को वरदान दिया और तब से लेकर आज तक इस भाई दूज रस्म को एक त्यौहार की तरह मनाना शुरू कर दिया गया।

भाई दूज त्यौहार का महत्व

भाई दूज के इस त्यौहार का महत्व सभी त्योहारों में से एक है भाई दूज का यह दावा यह दिखाता है कि एक भाई बहन का रिश्ता कितना अनोखा कितना अनमोल होता है दुनिया में ऐसे कई सारे कार्य आते रहते हैं जाते थे लेकिन हमें अपनी बहन के लिए हमें अपने भाई के लिए समय निकालना बहुत जरूरी होता है।

क्योंकि यमराज और यमुना जी की कथा हम यह सिखाता है की रिश्तो से बड़ा कार्य नहीं होता रिश्ते सबसे मायने रखते हैं हम अपने जीवन में कितने भी व्यस्त या फिर कितना भी काम क्यों ना कर रहे होते हैं लेकिन इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि कुछ ऐसे अवसर होते हैं।

जैसे कि कुछ पर होते हैं जैसे भाई दूज का त्यौहार रक्षाबंधन का त्यौहार ऐसे ऐसे त्योहारों में हमें अपनी बहन के लिए अपने भाइयों के लिए समय निकालना बहुत जरूरी है।

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क्योंकि यह आपके ही कल्याण के लिए होता है इसलिए यमराज और यही जमुना के कथा से सीखे और इस पर्व का महत्व समझा समझते हुए हर साल अपने भाइयों के लिए अपनी बहनों के लिए बहुत ही उत्साह के साथ इस पर्व को मनाए।

Conclusion

भाई दूज का त्यौहार हमारे जीवन में कितना महत्वपूर्ण है शायद ही आपको पता चल गया होगा त्योहार हमारे जीवन में खुशियां लेकर आते हैं इसलिए कभी भी इन खुशियों को दूर ना जाने दे जितना हो सके उतना इन खुशियों को अपने पास लाए अपने घरों में लाए अपने परिवार के बीच लाए।

ताकि आपका संसार आपका घर आपका परिवार कभी भी दुखी ना हो वो हमेशा सुखी रहे जैसा कि हमने यमराज और यमुना जी के कथा से सीखा। यमराज जी के पास कितने सारे कार्य थे लेकिन इसके बावजूद भी यमराज ने अपनी बहन यमुना से मिले और उनका आदर और सम्मान किए।

इसी तरह हमें भी अपने भाइयों का अपनी बहनों की हमेशा सम्मान करनी चाहिए उनकी बातों की आदत करनी चाहिए और जितने भी त्यौहार आते हैं उन सब को मनाना चाहिए अपने परिवार के साथ मनाना चाहिए ताकि आपके जीवन में हमेशा खुशियां रहें और भगवान का आशीर्वाद आप पर बनी रहे।