Bhagawat Geeta Ka Pehla Aadhya – पूरी जानकारी हिंदी में

(Bhagawat Geeta Ka Pehla Aadhya) हम सभी ने अपने जीवन में कभी ना कभी भगवत गीता को जरूर पढ़ा होगा भगवत गीता में हमारे जीवन के सारे परेशानियों का हल बताया जाता है। अगर आप अपने जीवन में कहीं भी फस चुके हो और आपको समझ नहीं आ रहा है कि आगे जीवन में क्या करना चाहिए तो आपको भगवती गीता जरूर पढ़ना चाहिए।

हम सभी के जीवन में ऐसा मोर जरूर आता है कि हमें कुछ भी समझ नहीं आता है कि हम आगे अपने जीवन में क्या करें हम चाहते हैं कि हमें कोई भी एक राह बता दें जिससे हम अच्छे और बुरे की समझ कर सके और अपने जीवन में अच्छा फैसला ले सेक अगर आप भी इन सभी सवालों के जवाब चाहते हैं तो आप एक बार बहुत गीता को अवश्य पढ़ें।

और आज का हमारा आर्टिकल भी इसी विषय पर है कि भगवत गीता का पहला अध्याय क्या है किस बारे में आज इस आर्टिकल में पूरा विस्तार रूप से जानेंगे अगर आप भगवत गीता के बारे में पूरी जानकारी जानना चाहते हैं तो आप Article को पूरा अंतर ऊपर है मैं आपको भगवत गीता का पहला अध्याय के बारे में बहुत ही आसान भाषा में समझाने की कोशिश करूंगा।

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तो भागवत गीता के पहले अध्याय का नाम है  “कुरुक्षेत्र में युद्धस्थल का सैन्यनिरीक्षण”। इस अध्याय में कुल छियालीस श्लोक हैं। इस अध्याय के दो भाग किए जा जा सकते है, पहले भाग में संजय और महाराज धृतराष्ट्र के बीच हो रही बातें है तो दूसरे अध्याय में अर्जुन और भगवान श्री कृष्ण के वार्तालाप का वर्णन किया गया है।

इस अध्याय की शुरुआत में संजय (जो कि महाराज धृतराष्ट्र के सारथी हैं एवम जिन्हें दिव्य आंखें प्राप्त थी कि वे कुरुक्षेत्र में हो रही घटनाओं को देख पाएं) महाराज धृतराष्ट्र से हो रहे महाभारत युद्ध के विषय मे बताते हैं। उन्होंने दोनो पक्षों के सेनाओं के वर्णन करते हुए यह बताया है कि किनकी सेना में कौन कौन महारथी है।

कौरवों की सेना में कौन कौन से योद्धा थे?

संजय धृतराष्ट्र को बताते हैं कि हमारी सेना में पितामह भीष्म, गुरु द्रोण, कर्ण, कृपाचार्य, विकर्ण, सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा, अश्वथामा जैसे वीर दुर्योधन का साथ दे रहे हैं। यह सारे बहुत ही मजबूत होता है जिन्होंने अपने जीवन में ऐसे बहुत सारे अच्छे कार्य की किए हैं उसकी वजह से आज भी इन सारे देवताओं का नाम लिया जाता है।

कौरवों के सेना एक बहुत ही मजबूत सेना थी जिसका मुकाबला करना सभी का बस में नहीं था इस सेना में भीष्म पितामह, गुरु द्रोणाचार्य, कर्ण, कृपाचार्य, विकर्ण, सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा, अश्वथामा जैसे बहुत ही महान महान योद्धा शामिल थे और इनका सेना बहुत मजबूत है ना हुआ करता था।

पांडवों की सेना में कौन कौन से योद्धा थे?

हम जानते हैं कि पांडवों की सेना में कौन-कौन से ऐसे ही योद्धा थे जिनकी वजह से एक पांडवों की सेना एक बहुत ही मजबूत सेना बन चुकी थी। इसके आगे संजय बताते हैं कि पांडवों की सेना में भी एक से एक वीर उपस्थित हैं। 

पांडु पुत्रों के अतिरिक्त उनकी तरफ से महारथी युयुधान, विराट, तथा द्रुपद आदि योद्धा हैं। इसके साथ ही धृष्टकेतु, चेकितान, काशीराज, पुरुजित, कुन्तिभोज तथा शैब्य जैसे शक्तिशाली योद्धा भी हैं। इन सभी महान योद्धा की वजह से ही पांडवों की सेना एक बहुत ही मजबूत सेना बनी थी और इस सेना को कोई भी नहीं हरा पाता लेकिन जिसकी जितनी सेना थी उसकी मजबूती उतना ही जायदा था।

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इस प्रकार संजय बताते हैं कि युद्ध तथा रणनीति के मामले में किसी की भी सेना पीछे नहीं है। इसके बाद अर्जुन अपने रथ के सारथी बने श्री कृष्ण से अपने रथ को दोनो सेनाओं के बीच ले जाने को कहते हैं जिससे कि वे पूरे युद्ध स्थल का जायजा ले सकें। श्री कृष्ण अर्जुन के रथ को दोनों सेनाओं के मध्य ले जाकर खड़ा कर देते हैं।

वहां पहुंचकर अर्जुन देखते है कि युद्ध मे सभी उनके अपने ही है जिनके विरुद्ध वह युद्ध करने आया है। अपने ही सगे संबंधियों को अपने सामने खड़ा देख उसके हाथ पांव फूलने लगे, उनका धनुष हाथ से छूट गया और वे लड़खड़ाकर रथ पर गिर गए। उन्होंने युद्ध करने से मना कर दिया। और इसके लिए उसने कई तर्क प्रस्तुत किए।

अर्जुन द्वारा युद्ध न करने के तर्क

अर्जुन ने कहा कि अपने ही बड़ों को मारकर उसे नरक में घोर यातना सहनी पड़ेगी। सामने वे लोग थे जो आदर के पात्र थे और उनके खिलाफ शस्त्र उठाना अर्जुन को पाप प्रतीत हो रहा था। अर्जुन चाहे तो उन सभी को मार सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा बिल्कुल नहीं किया क्योंकि बड़ों का आदर करना उन्हें बहुत अच्छे से आता था।

चाहे उनके सामने देवता हो या शैतान अगर वह उनसे बड़े हैं तो उसकी इज्जत वह बहुत ज्यादा करते थे और वह सोचते थे कि उन सभी को मार कर उनको नखत नहीं जाना है इसलिए उन्होंने उन सभी को नहीं मारा और अपने सर पाप नहीं उठाया।

अर्जुन ने फिर कहा कि इस युद्ध मे घोर विनाश होगा, औरतें विधवा हो जाएंगी और फिर दूषित संतान की प्राप्ति होगी। और धीरे-धीरे जैसा अर्जुन ने कहा बिल्कुल वैसा ही होता गया उस युद्ध में बहुत खूब अविनाश हुआ औरतें विधवा भी हुई और आगे चलकर ऐसे बहुत सारे दुष्ट संतान का जन्म भी हुआ।

अर्जुन ने इसके बाद यह भी कहा कि इस युद्ध मे वंश परंपरा खत्म हो जाएगी और पितरों का श्राद्ध करने के लिए भी कोई न बचेगा और पितर बिना श्राद्ध के ही रह जाएंगे। इतनी खराब समय आ गए थे जहां पर वंश परंपरा ही खत्म हो जाने वाला था और पितरों की जो पूजा होती है जो उनका साथ होता है वह भी नहीं होने वाला था।

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अर्जुन ने बहुत खुश हूं और कहीं ना कहीं वो इसके बारे में भी सोच रहे थे कि हमें इस युद्ध को बंद कर देना होगा या फिर मैं अपने परिवार वालों को कैसे मार दूं लेकिन अर्जुन ने इसके साथ ही अपने ही परिवार वालों को मारकर राज्य सुख नही भोगना चाहता था, अतः उसने अपने शस्त्र त्याग दिए और युद्ध न करने का फैसला किया।

FAQ on Bhagawat Geeta Ka Pehla Aadhya

Q1. गीता का कौनसा अध्याय रोज पढ़ना चाहिए?

वैसे तो गीता के प्रत्येक अध्याय का अपना अपना विशेष महत्व है, लेकिन फिर भी सातवें अध्याय का अपना एक अलग ही स्थान है। इसलिए इस अध्याय के रोज पढ़ने से उचित फल की प्राप्ति होती है

Q2. गीता को घर मे रखने से क्या होता है?

श्रीमद्भागवत गीता भगवान श्री कृष्ण का लिखित रूप है, इसे घर मे रखना वैसे ही है जैसे स्वयं भगवान को रखना। इसके घर मे रहने एवम पढ़ने से मन मे शांति रहती है। सभी प्रकर की बुराइयां दूर भागती है, बुरी और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और हम निर्भय बन सकते हैं।

Q3. गीता कब पढ़नी चाहिए?

गीता एक बहुत ही पवित्र ग्रंथ है, इसे सुबह स्नान आदि करके ही पढ़ना चाहिए। गंदे हाथों से इसे नही छूना चाहिए

Q4. भगवत गीता का पहला श्लोक कौन सा है?

भागवत गीता का पहला श्लोक महाराज धृतराष्ट्र द्वारा बोला गया है जिसमे उसने कुरुक्षेत्र को धर्मक्षेत्र कहकर संबोधित किया है “
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय।”

Conclusion

अतः हम यहां यही कह सकते हैं कि यह अध्याय अर्जुन के निषाद का अध्याय है। साथ ही यह हमें यह भी बताता है कि युद्ध का परिणाम हमेशा ही विनाशकारी होता है। महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों का युद्ध था जिसमें जब अर्जुन युद्ध करने को मना करता है तब भगवान श्री कृष्ण युद्ध के मैदान में उसे जो सीख देते हैं, उसी को श्रीमद्भागवत गीता में बताया गया है।

हमारे समय अब इतना भी युद्ध नहीं उठाए लेकिन महाभारत के समय ऐसे बड़े बड़े हुए थे जिन की कहानी आज भी सभी को पता है और भगवत गीता हमारे जीवन का एक ऐसा अध्याय है एक ऐसा श्लोक है अगर आप उसके बारे में जान लेते हो तो आपके जीवन के सारे समस्या का समाधान आपको मिल जाता है इसलिए अगर आप अपने जीवन से परेशान हो या फिर कोई सवाल का जवाब ढूंढ रहे हो।

तो आप भगवत गीता को अवश्य पढ़ें और भगवत गीता में ऐसे कई सारे श्लोक हैं जिन्हें अगर आप पढ़ते हैं तो आपके जीवन के सारे दुख और परेशानी खत्म हो जाते हैं इसलिए भगवत गीता को आप अवश्य पढ़ें और अपने जीवन के सारे परेशानी का हल निकाले।

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