आज के इस लेख में आप अलाउद्दीन खिलजी का पूरा इतिहास जानेंगे अलाउद्दीन खिलजी कौन थे? उनकी मृत्यु कैसे हुई? उनके पिताजी का नाम क्या था? उनका समराज क्या था उनके बारे में पूरा इतिहास अगर आप जानना चाहते हैं तो आप इस लेख के साथ बने रहें मैं आपको उनके जीवन परिचय के बारे में पूरा विस्तार रूप से बताने वाला हूं।

अलाउद्दीन खिलजी पूरे खिलजी खानदान की यह दूसरे शासक थे। अलाउद्दीन बहुत ही ताकतवर राजाओं में से थे अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा (जिनका नाम जलालुद्दीन फिरोज खिलजी था) को मार कर उनकी राजगद्दी अपने नाम कर ली और पूरे खिलजी परिवार में सबसे ताकतवर राजा अलाउद्दीन खिलजी बन गए और अपना विरासत को आगे ले गए और फिर पूरे भारत देश में अपने साम्राज्य को हर तरफ फैलाते रहें।

दोस्तों मैं बता दूं अलाउद्दीन खिलजी को अलेक्जेंडर का नाम बहुत पसंद था और वह दूसरे लोगों से अपने आप को इस नाम से बुलवाना ज्यादा पसंद करते थे। अलाउद्दीन खिलजी ने अपने राज्य में शराब की बिक्री पूरी बंद कर दी थी और उनको Sikandar-I-Sani (सिकंदर-आई- सनी) का खिताब दिया गया था।

Also Read:- Sam Manekshaw Biography in Hindi

अलाउद्दीन खिलजी ऐसे पहले राजा थे जिन्होंने दक्षिण भारत में अपना पूरा साम्राज्य चलाया था और उसमें अपनी जीत भी हासिल की थी। अलाउद्दीन खिलजी अपने साम्राज्य में एक बहुत ही ताकतवर और जुनून से भरे राजा थे और यही वजह है कि उनके इस युद्ध में उनको सफलता मिली।

लजी दक्षिण भारत में अपना प्रभाव लाते गए और अपने साम्राज्य को और भी बढ़ाते गए। जैसी जैसी खिलजी की ताकत बढ़ती जा रही थी वैसे वैसे उनकी सेना की संख्या भी बढ़ती जा रही थी। वैसे तो खिलजी के सीना बहुत बड़ी थी लेकिन उनकी हम राज्य में से कुछ ऐसे लोग थे जिनको खिलजी बहुत ज्यादा वफादार जनरल मानते थे जिनका नाम मलिक काफूर और खुश्रव खान था।

खिलजी ने दक्षिण भारत में अपना आतंक बहुत ज्यादा बढ़ाया हुआ था और वहां के सारे राज्यों में अपनी ताकत की वजह से सब के ऊपर एक डर सा बनाया हुआ था। वाह जितनी भी शासक मौजूद हुआ करते थे उनसे अलाउद्दीन खिलजी युद्ध किया करते थे और जो भी खिलजी से हार जाए करते थे खिलजी उनसे हर साल टैक्स वसूला करते थे।

खिलजी अक्सर मंगोल की सेना को हराकर उनके राज्य में अपना दबाव बनाता रहा मंगोल की सेना जो कि सेंट्रल एशिया में राज्य करती थी खिलजी ने उस को हराकर सेंट्रल एशिया में कब्जा करके उसे हासिल कर लिया था और आज के समय में सेंट्रल एशिया को अफगानिस्तान के नाम से भी जानते हैं।

क्या आप जानते हैं?

खिलजी ने वारंगल के काकतीय शासकों पर हमला करके दुनिया का सबसे बेशकीमती कोहिनूर का हीरा को भी हासिल कर लिया था। कोहिनूर हीरा जिसके नाम से लोग आज भी दंग रह जाते हैं उस हीरे को अलाउद्दीन खिलजी ने वारंगल के शासकों से हथिया लिया था आइए अब अलाउद्दीन खिलजी के प्रारंभिक जीवन के बारे में जानते हैं।

Check Also:- Syed Abdul Rahim Biography in Hindi

अलाउद्दीन खिलजी का प्रारंभिक जीवन एवं जीवन परिचय – Alauddin Khilji History in Hindi

Alauddin Khilji History in Hindi

Quick Information About Alauddin Khilji

पूरा नाम (Full Name)अलाउद्दीन खिलजी
दूसरा नाम (Other Name)जूना मोहम्मद खिलजी
जन्म (Birth Date)1250 एडी
जन्म स्थान (Birth Place)लक्नौथी, बंगाल
पिता का नाम (Father Name)शाहिबुद्दीन मसूद
पत्नी का नाम (Wife Name)कमला देवी
धर्म (Religion)मुस्लिम
मृत्यु तिथि (Dead Date)4 जनवरी 1316
मृत्यु स्थान (Dead Place)दिल्ली, भारत
बच्चे (Childers)कुतिबुद्दीन मुबारक शाह, शाहिबुद्दीन ओमर

अलाउद्दीन खिलजी का जन्म 1250 बीरभूम बंगाल में हुआ था। उनका पूरा नाम जूना मोहब्बत खिलजी रखा गया था। अलाउद्दीन खिलजी के पिता शाहिबुद्दीन मसूद कि जब मृत्यु हुई थी उसके बाद खिलजी का पूरा पालन पोषण अलाउद्दीन खिलजी के चाचा जलालुद्दीन फिरोज खिलजी ने किया था तुलसी के चाचा अलाउद्दीन खिलजी के पिता के समान ही थे क्योंकि खिलजी के पिताजी बचपन में एक ही लाल जी को छोड़कर चले गए थे।

Also Read:- Sardar Udham Singh Biography

खिलजी के चाचा जलालुद्दीन फिरोज खिलजी, खिलजी वंश के सबसे पहले सुल्तान थे। जलालुद्दीन ने अपनी बेटियों का निकाह अलाउद्दीन खिलजी और अलाउद्दीन के छोटे भाई अलमास बैग के साथ कर दिया था। निकाह के कुछ ही समय बाद अलाउद्दीन अपनी शादी से खुश नहीं थे इसलिए उन्होंने दूसरी शादी की मैं आपको बताना चाहता हूं अलादीन की दूसरी बेगम का नाम महरु था।

अलाउद्दीन खिलजी का साम्राज्य विस्तार एवं शासनकाल हिंदी में

अब बात करते हैं अलाउद्दीन खिलजी का साम्राज्य के बारे में अलाउद्दीन खिलजी वंश के प्रथम सुल्तान जलालुद्दीन फिरोज के दरबार में खिलजी को आमिर- आई-तूजुक बनाकर लाया गया था इसके बाद 1291 में मालिक छज्जू जलालुद्दीन फिरोज के राज्य में विरोध कर दिया था इस परेशानी को अलाउद्दीन खिलजी ने काफी आराम से संभाला था इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी को कारा का शासक बना दिया था।

साल 1292 में जब भिलसा में एक युद्ध हुई थी उस युद्ध में अलाउद्दीन खिलजी ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था और अपने सुल्तान को जिताया भी था इसके बाद अलाउद्दीन को अवध प्रांत भी दिया गया था।

फिर इसी के कुछ समय बाद अलाउद्दीन खिलजी ने अपने सुल्तान जलालुद्दीन फिरोज खिलजी से बहुत बड़ा विश्वासघात किया था जलालुद्दीन खिलजी को मार कर दिल्ली के सुल्तान के गद्दी पर अलाउद्दीन ने अपना नाम कर लिया था जब अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा को मार कर दिल्ली के सुल्तान की गद्दी पर अपना नाम किया और उसके बाद अलाउद्दीन खिलजी को आने वाले 2 सालों तक कुछ युद्ध का सामना करना पड़ा। 2 सालों तक खिलजी ने अपने बुद्धि से अपनी ताकत से अपने राज्य पर अपना नाम बनाए रखा और इस समस्या से पूरी ताकत से सामना किया।

Check Also:- Gangubai Kathiawadi Biography

साल 1296 से लेकर 1308 के बीच में मंगोल शासक लगातार दिल्ली पर अपना कब्जा जमाने के लिए अलग-अलग तरीके से अलाउद्दीन पर हमला करते रहें युद्ध करते रहे लेकिन हर बार अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोल पर अपनी जीत हासिल की हर बार खिलजी ने यह साबित किया कि दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ही है।

इसके बाद बहुत सारे मंगोल दिल्ली शहर के आसपास ही रहने लगे उन्होंने दिल्ली शहर को छोड़ा नहीं और इस्लाम धर्म को भी अपनाया और वहां पर अपना जीवन जीने लगे।

अलाउद्दीन खिलजी को उन सारे मन मंगोलिया पर विश्वास नहीं था और कहीं ना कहीं अलाउद्दीन खिलजी उन सारे मंगोलिया का एक नया साजिश समझ रहे थे। खिलजी नहीं चाहते थे कि दिल्ली शहर के आसपास कोई भी शासक के लोग रहे वह उन सब को मारना चाहते थे जो भी उनके आसपास थे।

खिलजी अपने साम्राज्य को सुरक्षित रखने के लिए साल 1298 मैं अचानक एक दिन अलाउद्दीन खिलजी ने दिल्ली शहर के आसपास जितने भी मंगोलिया रहते थे उन सभी को मार डाला मैं आपको बता दूं मंगोलिया की संख्या लगभग 30 हजार थी इन सब को अलाउद्दीन खिलजी ने मार कर उन सारे मंगोलिया के पत्नी और बच्चे को अपने शासक में एक गुलाम के रूप में रख लिया।

अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात शहर में अपनी सबसे बड़ी जीत साल 1299 में हासिल की थी। साल 1303 में अलाउद्दीन खिलजी ने रंथाम्बोर के राजपूताना किले में अपना पहला वार किया था लेकिन इसमें वह जीत नहीं पाए इसमें उनको निराशा हाथ से हुई इसके बाद खिलजी ने दोबारा उस पर हमला किया और इस हमले के दौरान खिलजी का सामना पृथ्वीराज चौहान के वंश के राजा राणा हमीर देव से हुआ था।

दूसरे हमले के दौरान अलाउद्दीन खिलजी ने राजा राणा हमीर देव को मार कर रंथाम्बोर पर अपना कब्जा हासिल कर लिया था। इस युद्ध में हमीर देव ने काफी बहादुरी से और काफी बुद्धि से युद्ध किया था लेकिन इस बार जीत नहीं पाए और उनको अपनी जान गवाना पड़ा।

साल 1303 में खिलजी ने वारंगल शहर में अपनी सेना भेजी ताकि वहां जाकर उसकी सेना वहां के शासक को हरा पाए लेकिन दुख की बात यह है कि वारंगल की काकतीय शासक से खिलजी की सेना हार गई और 1303 में ही खिलजी ने चित्तौड़ राज्य पर हमला करने की कोशिश की वह राज्य रावल रतन सिंह का था। अलाउद्दीन खिलजी ने वहां के राजा रावल रतन सिंह को मारकर उसके राज्य पर कब्जा जमा लिया। 

साल 1306 मैं अलाउद्दीन खिलजी की सेना सबसे बड़े राज्य बंग्लाना में हमला करने की कोशिश की और यहां पर अलाउद्दीन खिलजी की सेना को सफलता प्राप्त हुई इसके बाद इस राज्य की शासक राय करण थे जिनकी सुपुत्री को खिलजी दिल्ली लेजाकर उसका विवाह अपने बड़े सुपुत्र से कर दिया।

Also Read:- Abhinav Bindra Biography in Hindi

तकरीबन साल 1308 में अलाउद्दीन खिलजी के विश्वासी जनरल मलिक कमालुद्दीन ने मेवाड़ के सिवाना किले पर हमला करने की कोशिश की लेकिन इस बार खेल जी की सेना मेवाड़ की सेना से हार गई इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी रुकने वाले नहीं थे खिलजी ने दोबारा मेवाड़ की सेना पर हमला किया और इस बार खिलजी का सेना को जीत प्राप्त हुई।

अलाउद्दीन खिलजी के उपलब्धियां – Alauddin Khilji Achievements in Hindi

ऐसे तो अलाउद्दीन खिलजी एक बहुत ही बुरा शासक था उसने बहुत सारे राज्य में अपना तानाशाही दिखाया उन पर अपना कब्जा किया लूटपाट किया काफी लोगों को बंधी भी बनाया लेकिन इन सबके बावजूद अलाउद्दीन खिलजी ने अपने राज्य में ऐसे कई सारे व्यवस्था आम जनता तक पहुंचाई है जिनसे आम जनता को काफी लाभ मिला और यह कहीं ना कहीं अलाउद्दीन खिलजी के उपलब्धियों है तो चलिए मैं आपको एक-एक करके अलाउद्दीन खिलजी के उपलब्धियों के बारे में बताता हूं।

  • अलाउद्दीन खिलजी हमारे भारत देश का पहला मुस्लिम सुल्तान था जिसने दक्षिण भारत पर अपनी जीत हासिल की थी और इसके बाद यहां खिलजी ने भव्य मस्जिद का निर्माण भी कराया था।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने सुल्तान बनने के बाद बहुत अच्छे व्यवस्था लागू किया जिसमें से एक कुशल राजस्व प्रशासन की स्थापना भी कराया था।
  • अलाउद्दीन खिलजी के शासन काल के दौरान खेती बारी की स्थिति में काफी सुधार लाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुत सख्त कानून भी बनाएंगे और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के लिए अधिकारियों को रोजगार भी दिया गया।
  • अलाउद्दीन खिलजी अपने शासनकाल के दौरान महंगाई पर काफी रोक लगाया महंगाई को काफी कम किया खिलजी ने अनाज कपड़े रोजमर्रा मैं इस्तेमाल हुए वस्तुओं कदम काफी कम किया जिससे आम जनता को काफी लाभ हुआ।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने एक Tax System को लागू किया जो काफी अच्छा था आम जनता को इससे काफी फायदा होता था और यह Tax System इतना अच्छा रहा कि इसको लोग 19वीं सदी और भी सी सदी में भी जारी रखें।

अलाउद्दीन खिलजी के कुछ रोचक तथ्य – Alauddin Khilji Facts in Hindi

  • अलाउद्दीन खिलजी के चाचा जलालुद्दीन फिरोज खिलजी जो कि उसके पिता समान थे उन्हें मार कर दिल्ली सुल्तान की गद्दी को हासिल कर लिया और उस पर अपना शासन चलाना शुरु कर दिया।
  • अलाउद्दीन खिलजी आमतौर पर एक बहुत ही क्रूरवादी और घमंडी इंसान था और खिलजी अपने आप को दुनिया को मुट्ठी में करने वाले सिकंदर समझता था और खुद को दुनिया का सबसे बड़ा सिकंदर कहता था।
  • बहुत सारे युद्ध में मंगोलों को अलाउद्दीन खिलजी ने बहुत बुरी तरह से पराभूत किया था।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने अपने राज्य में सारे नशीले पदार्थ (शराब, भांग, जुबा) को बंद करवाने की घोषणा की थी।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने एक ऐसा Tax System का निर्माण किया था चौकी काफी लाभदायक था और इससे लोग 19वीं और 20वीं सदी में भी जारी रखें और इसी के साथ साथ अलाउद्दीन जासूस विभाग की भी स्थापना करवाई थी।
  • अलाउद्दीन खिलजी चित्तौड़ राज्य की महारानी पद्मावती के मोह में मोहित हो गया था और उसे पाने के लिए उससे जाकर बात की लेकिन चित्तौड़ राज्य की महारानी पद्मावती ने साफ इनकार कर दिया तब इस गुस्से में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ पर हमला करके सब को मार डाला और इसी के साथ महारानी पद्मावती के पति राजा रतन सिंह की भी मृत्यु कर दी गई थी।

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु – Alauddin Khilji Death in Hindi

हमारे भारत देश के पूरे इतिहास में अलाउद्दीन खिलजी जो कि एक क्रूर और निर्दई शासकों में से एक थे उनकी मृत्यु 1316 मैं हो गई थी उस समय अलाउद्दीन खिलजी 66 साल के थे जिसमें उनकी मृत्यु हुई थी। अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु करने वाले के बारे में अब तक कुछ पुख्ता सबूत नहीं है लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि अलाउद्दीन खिलजी को काफी लंबे समय से एक गंभीर बीमारी थी इस वजह से उनकी मृत्यु हुई और कुछ का कहना यह है कि खिलजी के खास आदमी मलिक नायक ने उनकी हत्या की है। अलाउद्दीन खिलजी का कब्र दिल्ली के महरौली में स्थित कुतुब कंपलेक्स में मौजूद है।

FAQ on Alauddin Khilji History in Hindi

Q1. अलाउद्दीन खिलजी की Death कैसे हुई?

अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु एक लंबे समय तक किसी रोक की वजह से हुई थी काफी समय से अलाउद्दीन खिलजी एक रोग से ग्रसित है और वह अंतिम समय में अपने वफादार मलिक काफूर को खुद को मारने के लिए बोला तब जाकर काफूर ने खिलजी के कहने पर उन्हें इस दुनिया से अलविदा कह दिया।

Q2. अलाउद्दीन खिलजी का कब्र कहां है?

अलाउद्दीन खिलजी का कब्र दिल्ली के महोली में कुतुब कंपलेक्स मैं है।

Q3. अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम क्या था?

अलाउद्दीन खिलजी के पिता का नाम शाहिबुद्दीन मसूद था।

Q4. अलाउद्दीन खिलजी को किस उपाधि (Title) के लिए सम्मानित किया गया था?

सिकंदर-आई- सनी